हाई प्रोफाइल मामलों में वकील विजय अग्रवाल लंदन में गिरफ्तार

हाई प्रोफाइल मामलों में वकील विजय अग्रवाल लंदन में गिरफ्तार

हाई-प्रोफाइल मामलों के वकील विजय अग्रवाल लंदन में गिरफ्तार: महादेव सट्टा ऐप और मेहुल चोकसी का कानूनी बचाव करने वाले वकील पर यौन उत्पीड़न के 4 गंभीर आरोप!! 

भारत के सबसे चर्चित और बड़े आर्थिक अपराधों के आरोपियों का कानूनी बचाव कर सुर्खियों में रहने वाले नामी वकील विजय अग्रवाल अब खुद कानून के शिकंजे में फंस गए हैं। लंदन के पॉश इलाके मेफेयर से मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने उन्हें दो महिलाओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के चार गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। अदालत में पेशी के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए दक्षिणवार्क (Southwark) की उच्च अदालत भेज दिया गया है। उनके साथ उनकी निजी सहायक मनप्रीत कौर को भी इन घटनाओं में मदद करने और बढ़ावा देने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

लंदन में गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम

 तारीख और लोकेशन: लंदन पुलिस के मुताबिक, 11 अगस्त को मेफेयर स्थित एक संपत्ति से विजय अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया।

 उन पर दो महिलाओं से जुड़े चार यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) के मामले दर्ज किए गए हैं और उनकी नीजी सचिव मनप्रीत कौर पर इन कृत्यों में जानबूझकर सहयोग और बढ़ावा देने के दो आरोप लगाए गए हैं। 13 अगस्त को दोनों को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे की विस्तृत सुनवाई के लिए दक्षिणवार्क उच्च न्यायालय (Crown Court) ट्रांसफर कर दिया गया।

विजय अग्रवाल देश के कई हाई-प्रोफाइल और अरबों रुपये के घोटालों के प्रमुख आरोपियों की अदालतों में पैरवी करने के लिए जाने जाते हैं। महादेव सट्टा ऐप सिंडिकेट , सूरज चोखानी (मनी लॉन्ड्रिंग का प्रमुख आरोपी) , सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर जुलाई 2025 में चोखानी को दिलाई थी जमाजमान,  भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी | प्रत्यर्पण (Extradition) और अन्य कानूनी मामलों में चोकसी का पक्ष रखा। 

हजारों करोड़ के चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी, हरिशंकर टिबरेवाल और गिरीश तलरेजा के साथ-साथ सूरज चोखानी का नाम प्रमुखता से शामिल रहा है। उच्चतम न्यायालय के 2 अप्रैल 2025 के आदेशों के अनुसार, चोखानी की ओर से पेश अधिवक्ताओं के पैनल में विजय अग्रवाल का नाम दर्ज था।

(नोट: कानूनी दृष्टि से किसी आरोपी का वकील होना अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं होता। लंदन में दर्ज मामले भी फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन हैं और उन पर आरोप सिद्ध होना बाकी है।)