मुफ्त शिक्षा की घोषणा विद्यालय के लिए बनी आर्थिक मुसीबत

मुफ्त शिक्षा की घोषणा विद्यालय के लिए बनी आर्थिक मुसीबत

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

ओडिशा सरकार की ‘ज्ञानोदय–शिक्षा से समृद्धि’ योजना के तहत 2026-27 शैक्षणिक सत्र से केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार की इस पहल से गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों को राहत मिली है, लेकिन शुल्क पर निर्भर कई निजी शिक्षा संस्थानों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। लाइंग स्थित कांसबहाल उच्च माध्यमिक विद्यालय ऐसा ही एक संस्थान है। सरकारी घोषणा के बाद इस विद्यालय में विद्यार्थियों से शुल्क लेना बंद कर दिया गया है, परंतु शुल्क से होने वाली आय की भरपाई के रूप में अब तक सरकार से कोई राशि नहीं मिली है। इससे विद्यालय के नियमित खर्चों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है। विद्यालय में करीब 450 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें 75 प्रतिशत छात्राएं हैं और अधिकांश आदिवासी समुदाय से हैं। विद्यालय में शिक्षक और गैर शिक्षक मिलाकर कुल 15 लोग कार्यरत हैं। इनमें नौ को सरकारी वेतन मिलता है। शेष छह कर्मचारियों का वेतन का भुगतान विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से किया जाता है।

सरकारी घोषणा से पहले विद्यालय में दाखिला के समय प्रत्येक विद्यार्थी से सालाना 5,050 रुपये शुल्क लिया जाता था। इसी राशि से छह कर्मचारियों के वेतन के अलावा बिजली बिल, इंटरनेट, समाचार पत्र, रखरखाव तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे किए जाते थे। मुफ्त शिक्षा योजना लागू होने के बाद छात्र छात्राओं से दाखिले के समय कोई शुल्क नहीं लिया गया। उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इसकी भरपाई करेगी। चालू सत्र में नामांकन शुरू हुए करीब चार माह हो चुके हैं पर शुल्क के विकल्प के रूप में सरकार से अब तक अनुदान नहीं मिलने से विद्यालय के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।  प्रबंधन समिति द्वारा नियुक्त दो शिक्षक, एक क्लर्क, एक डीईओ और दो सफाई कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी कठिन होता जा रहा है। प्रबंधन का कहना है कि यदि शीघ्र आर्थिक सहायता नहीं मिली तो इसका असर विद्यालय के दैनिक संचालन और शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।

घोषणा के साथ आर्थिक भरपाई की मांग

शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा देना सरकार का स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन जिन विद्यालयों की आय विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क पर निर्भर थी, उनकी आर्थिक व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। शुल्क बंद होने के बाद आय की भरपाई नहीं होने पर ऐसे संस्थानों के लिए कर्मचारियों का वेतन और अन्य जरूरी खर्च वहन करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से कांसबहाल उच्च माध्यमिक विद्यालय को आवश्यक आर्थिक सहायता अथवा अनुदान शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि आर्थिक संकट का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर न पड़े।