बस्ती और गोंडा़ जिले में इसाई धर्मांतरण कार्य जोरों पर

बस्ती और गोंडा़ जिले में इसाई धर्मांतरण कार्य जोरों पर

उत्तर प्रदेश के बस्ती और गोंडा जीले के  गांवों में ईसाई मिशनरियां  सेवा के नाम पर बड़े पैमाने पर करा रही है गैर ईसाइयों का धर्म परिवर्तन 

बस्ती -पिछले दिनों क्रिसमस की धूम रही गांव से लेकर शहर तक गुलजार रहे।देहाती क्षेत्रों से लेकर शहरों तक रातों में डीजे की धुन पर सब मैरी क्रिसमस मनाते रहे।और सुबह क‌ई जगहों पर प्रार्थना सभायें आयोजित की गई। यह प्रार्थना सभाये़ क‌ई जगह सार्वजनिक रूप से आयोजित की गई तो कई जगहों पर घरों में गोपनीय तरीके से प्रार्थना सभा की गई।अब गौर करने वाली बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं भी ईसाई समुदाय के मतावलंबी पंजीकृत नहीं है घरौनी , खतौनी, राशनकार्ड धारकों में विरले ही इस समुदाय के सदस्य गोंडा और बस्ती में मौजूद मिलेंगे। फिर भी बस्ती और गोंडा के गांवों में इस बार क्रिसमस-डे धूम धाम से मनाया गया।क‌ई कस्बों और गांवों में हिंदू संगठनों ने विरोध भी किया। हर्रैया तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत बभनान में गन्ना सोसायटी के पीछे गली में एक घर को गिरजाघर के रूप में परिवर्तित कर प्रार्थना सभा आयोजित की गई। प्रार्थना सभा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष सहभागी रहे ।इस तरह की भीड़ से बाजार में हिन्दू संगठनों ने एकत्रित होकर पुलिस को सूचना दी । पुलिस के पहुंचने से पहले ही काफी लोग इधर उधर हो गये । पुलिस ने पहरा बिठाया जिससे कोई अप्रिय घटना न घटित हो सके। हिन्दू संगठनों को समझा बुझाकर शांत किया गया और इसके पीछे की मंशा को समझने के लिए पुलिस  ने उग्र लोगों से समय मांगा।उधर क्षेत्र में चर्चा है कि इतने बड़े पैमाने पर इतने लोग प्रार्थना सभा में कैसे पहुंचे।यह चर्चा आम है कि हो न हो इस क्षेत्र में धर्मांतरण का खेल फिर शुरू हो गया है।कुछ बर्ष पूर्व इसी तरह का प्रयोग बभनान कस्बे में पहले भी ईसाई मिशनरियों ने किया था, जहाँ भारी विरोध के बाद उक्त स्थान पर ताला लगाकर पादरी चले गए थे।अब पुनः वहां प्रार्थना सभा आयोजित होने से हिंदू संगठनों में रोश है। ग़रीबी और सामाजिक असमानता से जूझ रहे वंचित समाज में कैथोलिक ईसाईयों ने अपनी पहुंच बना ली है और बस्तियों में सेवा के नाम पर धर्मांतरण का यह खेल धड़ल्ले से जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोंडा और बस्ती के कई क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों ने शिक्षण संस्थाओं को खोलकर लोगों को पहले जोड़ा हैं।सेवा के कार्यों में नौकरी देकर महिलाओं और पुरुषों का उपयोग करते हैं।यही लोग इनका काम आसान करते हैं।छोटे बच्चों को गृह शिक्षा मलिन बस्तियों में उपलब्ध कराकर और आर्थिक मदद पहुंचाकर उनका ब्रेनवाश किया जाता है । फिर उन्हें प्रार्थना सभाओं में आमंत्रित कर  ईसाई धर्म ग्रहण करा दिया जाता है। हर्रैया , बस्ती, कलवारी सहित अनेक कस्बों में मिशनरी स्कूलें  सेवा के नाम पर इस तरह के कुचक्र में शामिल हैं।प्रत्यक्ष रुप से इनकी संलिप्तता का कहीं कोई प्रमाण न मिलने से इनके पौ बारह हैं। जबकि सर्वविदित है जब इस तरह के स्कूल कालेज यहां नहीं थे तो धर्म परिवर्तन की एक भी घटना कहीं घटित नहीं हो रही थी। नाम ना छापने के शर्त पर क‌ई लोग जो इन संस्थानों से जुड़े हैं उन्होंने धर्मांतरण के इस खेल का खुलासा किया। हर्रैया के आस पास के तमाम गांवों में लुके छीपे तरीके से धर्मांतरण का यह खेल जारी है।समय रहते अगर इस पर शासन प्रशासन ध्यान नहीं देगा तो इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले कुछ समय में बड़े पैमाने पर लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित करा दिये जायेंगे।