थाने में सीसीटीवी हुआ बंद तो वर्दी पर गिरेगी गाज
‘कैमरा बंद... तो वर्दी पर गिरेगी गाज!’: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का पुलिस को दो टूक फरमान, थानों के 'अंधेरे खेल' पर लगा कड़ा पहरा
बिलासपुर : थानों में 'तकनीकी खराबी' का बहाना बनाकर CCTV बंद करने और फिर मनमानी करने वाले पुलिस अफसरों की अब खैर नहीं! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिसिया रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर थाने की तीसरी आंख बंद मिली या फुटेज गायब हुई, तो सीधे थानेदार और जिम्मेदार अफसरों की गर्दन नपेगी।
18 महीने का पूरा 'कच्चा-चिट्ठा' रखना होगा सुरक्षित
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ दीवारों पर शो-पीस की तरह कैमरे लटकाने से काम नहीं चलेगा। कैमरे 24 घंटे चालू रहने चाहिए और पुलिस को पूरे 18 महीने (डेढ़ साल) का बैकअप हर हाल में महफूज रखना होगा। 'फुटेज ऑटो-डिलीट हो गई' या 'सिस्टम खराब था' जैसे घिसे-पिटे बहाने अब अदालत में नहीं चलेंगे।
हाईकोर्ट के कड़े निर्देश:
अफसरों पर सीधी कार्रवाई: किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक 'लापरवाही' के नाम पर फुटेज गायब हुई, तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर सीधी विभागीय व कानूनी कार्रवाई होगी। पावर बैकअप और स्टोरेज: लाइट जाए या आंधी-तूफान आए, बैकअप सिस्टम ऐसा हो कि रिकॉर्डिंग एक सेकंड के लिए भी न रुके। 550 थानों पर ₹102 करोड़ का पहरा: प्रदेश भर के 550 थानों को आधुनिक सर्विलांस से लैस करने के लिए 102.10 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम तेज करने का अल्टीमेटम।
क्या था मामला?
गौरेला थाने से जुड़े एक NDPS (नशीले पदार्थ) मामले में जब आरोपियों ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सितंबर 2024 की फुटेज मांगी, तो पुलिस ने रटा-रटाया जवाब दे दिया कि डेटा 18 महीने बाद अपने आप डिलीट हो गया। पुलिस की इस दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूरे महकमे के लिए सख्त गाइडलाइन जारी कर दी। अब देखना यह होगा कि 102 करोड़ के इस हाईटेक पहरे के बाद थानों के 'हिडन कैमरों' से सच बाहर आता है या पुलिस बहानेबाजी का कोई नया तोड़ निकालती है!





