ओडिशा में नौकरी खोने के डर से सरकारी अधिकारीयों ने फर्जी अधिकारीयों को दिए लाखों की रिश्वत

ओडिशा में नौकरी खोने के डर से सरकारी अधिकारीयों ने फर्जी अधिकारीयों को दिए लाखों की रिश्वत

अपनी नौकरी खोने के डर से ओडिशा में 20 से अधिक सरकारी अधिकारीयों ने नकली अधिकारी को लाखो रूपये की रिश्वत दे दी। इस हास्यास्पद और आश्चर्यजनक घटना का खुलासा राउरकेला पुलिस अधीक्षक नितिश वाधवानी ने दिनांक 12 दिसम्बर, दिन शुक्रवार की शाम राउरकेला पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में किया। पुलिस के अनुसार दो लोग स्वयं को सतर्कता विभाग का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बताकर ओडिशा में उच्च पदों पर नियुक्त सरकारी अधिकारीयों को जिनमें प्रशासनिक अधिकारी भी शामील है, फोन पर उनके खिलाफ शिकायत पाने और गलत तरीके से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाकर‌ उनपर जांच करने का भय दिखाकर उनसे लाखों रूपये रिश्वत के रूप में ऐंठ लिए। दूसरी ओर इन अधिकारीयों ने उन्हें अपनी नौकरी खोने और बदनामी के डर से लाखों रूपये दे भी दिए। यह पूरा घटनाक्रम साफ दर्शा रहा है कि जिन अधिकारीयों/प्रशासनिक अधिकारियों ने इन नकली अधिकारीयों को लाखों रूपये रिश्वत के रूप में दिए, वे अवश्य ही भ्रष्टाचार में लिप्त होगें। फिर क्यो ना उन अधिकारीयों की कार्यशैली पर जांच होनी चाहिए। 

राउरकेला पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बनई पुलिस स्टेशन में दिनांक 11.12.2025 को दो लोगों पर इस संदर्भ में आपराधिक मामला संख्या 272 के धारा 308(2)/318(4)/319(2) बीएनएस के साथ धारा 66(सी)/66(डी) के तहत दर्ज किया गया है।

सुबर्णपुर जिले के बिरमहाराजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मेंदमाल निवासी गणेश प्रसाद नंदा पुत्र शंभू प्रसाद नंदा के खिलाफ आयकर अधिनियम 2000 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला एक वरिष्ठ ओएएस अधिकारी की लिखित रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें शिकायतकर्ता से धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, आपराधिक धमकी और कपटपूर्ण तरीके से 4,00,000 रुपये की उगाही का आरोप है। उसने स्वयं को "त्रिपाठी बाबू" बताया और दावा किया कि उसे हाल ही में सतर्कता विभाग में अतिरिक्त एसपी के पद पर पदोन्नत किया गया है। उसने यह भी कहा कि उसके खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति रखने के आरोप में सतर्कता विविध मामला संख्या 77/2025 दर्ज किया गया है। उसने शिकायतकर्ता से 4,00,000 रुपये की पूरी राशि अपने बैंक खाते के माध्यम से प्राप्त की, जो सुकांति नंदा के नाम पर है।

जांच के दौरान यह साबित हुआ कि आरोपी गणेश प्रसाद नंदा एक आदतन जालसाज है, जो सह-आरोपी प्रदीप कुमार पांडा (उसके साले) की मदद से विभिन्न सरकारी अधिकारियों से फोन पर खुद को अतिरिक्त एसपी, सतर्कता बताकर जबरन वसूली करता आ रहा है। दोनों ने सतर्कता विभाग के नाम का दुरुपयोग करते हुए सुंदरगढ़, क्योंझर, देवगढ़ और अन्य जिलों के कई सरकारी अधिकारियों से लाखों रुपये वसूले। उन्होंने सरकारी अधिकारियों को अनुपातहीन संपत्ति रखने के आरोप में उनके घरों पर छापा मारने की धमकी दी। कुछ सरकारी अधिकारियों ने सामाजिक बदनामी से बचने के लिए उनकी मांगें पूरी कर दीं। इस मामले में, उन्होंने शिकायतकर्ता से 8,00,000 रुपये की मांग की और अंत में सतर्कता मामले को निपटाने के लिए शिकायतकर्ता से 4,00,000 रुपये लिए। मामले की जांच जारी है और आरोपियों के बैंक खातों के साथ-साथ उनकी संपत्तियों का भी उचित सत्यापन किया जा रहा है।

आरोपी व्यक्ति

1. गणेश प्रसाद नंदा पुत्र- संभु प्रसाद नंदा, गांव-मेंदामल, थाना- बिरमहाराजपुर, जिला-सुबरनापुर।

2. प्रदीप कुमार पांडा पुत्र-धोबी चरण पांडा, गांव-नकदेही, थाना-उलुंडा, जिला-सुबरनापुर।

सामान जब्त

1. पासबुक: एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, बीओआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बंधन बैंक, बोलंगीर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, उत्कला ग्राम्य बैंक, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, इंडियन ओवरसीज बैंक, राष्ट्रीय लघु बचत पासबुक (इंडिया पोस्ट), राष्ट्रीय लघु बचत पासबुक आदि की कुल 43 बैंक पासबुक।

बचत पासबुक (इंडिया पोस्ट), राष्ट्रीय लघु बचत पासबुक (इंडिया पोस्ट), बचत बैंक पासबुक (इंडिया पोस्ट), पीपीएफ खाता (इंडिया पोस्ट), डाकघर जीवन बीमा।

2. डेबिट/क्रेडिट कार्ड: विभिन्न बैंकों के 38 एटीएम कार्ड।

3. चेकबुक: विभिन्न बैंकों की 37 चेकबुक।

4. मोबाइल फोन: 10 मोबाइल फोन

5. आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन संबंधी दस्तावेज आदि सहित अन्य दस्तावेज।

6. केंद्रीय सतर्कता आयोग का एक "प्रतिबद्धता प्रमाण पत्र"।

7. एक पुस्तक "भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 पर टिप्पणी"।

8. एबीसी टीवी के 2 बूम।

9. एक लेनोवो लैपटॉप।

10. नकद: 25180 रुपये (गणेश प्रसाद नंदा द्वारा 12780 रुपये और प्रदीप कुमार पांडा द्वारा 12400 रुपये)