हिंगुला कोयला खदान क्षतिग्रस्त ग्रामीणों का धरना
अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)
तालचेर प्रखंड के तहत सभी भूमिहीन लोगों ने हिंगुला कोयला खदान में रोजगार, बंदोबस्त, आंतरिक भूमि और भूमि के उचित मूल्य के बारे में चर्चा करने के लिए गत 23/06/2022 को जिलापाल की अध्यक्षता में बैठक की। गांव और प्रभावित ग्रामीणों की सभी समस्याओं का समाधान जिला प्रशासन द्वारा एक वादा किया गया था। बैठक में उपजिलपाल, भूमि सर्वेक्षण अधिकारी और एमसीएल निदेशक (व्यक्तिगत) जीएम एलएंडआर, जीएम हिंगुला क्षेत्र और अन्य वरिष्ठ अधिकारी और हिंगुला गांव के सदस्य शामिल थे। इस बैठक में जो भी निर्णय लिया गया, उसे आज तक लागू नहीं किया गया, इसलिए ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आज हिंगुला प्रबंधक कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। धरना पर बैठे लोगो का आरोप यह था कि - उन सभी के घोषणा पत्र देने के बावजूद,निर्तिधारित तिथि घोषित नहीं की गई थी, और ना ही अब तक कोई कार्रवाई की गई है, भूमि और सीबीए नियमों के आरएफसीटीएएल आरआर नियमों के अनुसार कोई मुआवजा नहीं दिया गया है, जहां भूमि का मूल्य अधिक है, उक्त गांवों के साथ-साथ मल्लीबंध और कुशुमपाल को भी अधिग्रहण नोटिस जारी किए गए, उपजिलपाल की बैठक में निर्णय लिया गया कि पुरस्कार और नौकरी एक साथ दी जाएगी,
लेकिन उन गांवों के सभी ढांचे 12/12/2018, को बिना किसी प्रकार की जांच के, सभी भुगतान किए गए थे। लेकिन हमारे गांव को एक ही समय में सम्मानित नहीं किया गया था, इसलिए जिस तरह से उनके दो गांवों का अधिग्रहण किया गया था, उसी तरह हमारे गांव का भी अधिग्रहण किया जाना चाहिए और हमारी सभी सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए।





