सरकारी संस्थाओं में लगाई गई सीसीटीवी कैमरे महज खानापूर्ति साबित हो रही है
सरकारी संस्थाओं में लगाई गई सीसीटीवी कैमरे महज खानापूर्ति है या सजावट के लिए लगाई गई है, यह बहुत बड़ा प्रश्न है? मामला यह है कि एक 57 वर्षीय व्यक्ति पुरूषोत्तम बल को, 2 अक्टूबर की शाम जख्मी हालत में राउरकेला सरकारी अस्पताल में लाया गया। पुलिस के अनुसार पुरुषोत्तम बल सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। और इस अस्पताल में उनकी मौत हो गई। जब इसकी खबर स्वर्गीय सत्यजीत बल के पूत्रो को हुई तो वे यह जानने के लिए कि उसके पिता को किसने अस्पताल में लेकर आया था, अस्पताल प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज की मांग करने लगे। बहुत बात विवाद और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आरजीएच के निर्देशक ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। परंतु अंततः फरीयादी को सीसीटीवी फुटेज मिला ही नहीं।

दूसरा मामला है बण्डामुण्डा थाने का जहाँ पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को डराया धमकाया गया। और जब उस व्यक्ति ने आरटीआई के माध्यम से थाने की सीसीटीवी फुटेज की मांग की तो अपील में जाने के बाद भी उसे सीसीटीवी फुटेज नहीं दी गई। फिलहाल यह मामला राज्य सूचना आयुक्त के द्वारा दर्ज किया गया है। और इसकी सुनवाई दिसम्बर माह की 23 तारीक को होनी है।

यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या सरकारी संस्थाओं में लगे सीसीटीवी कैमरे केवल सजावट की बस्तू है या महज खानापूर्ति के लिए इसे लगाया गया है।





