शुद्ध पेयजल परियोजना से वंचित ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
कागजो में चकाचक दिखने वाला वसुधा जल परियोजना की धरातल में क्या सच्चाई है इसका जीवंत उदाहरण तालचेर में देखने को मिल रहा है।
तालचेर प्रखंड के अंतर्गत संतपाड़ा, गुरजंगुली, जगन्नाथपुर और बंटोल ग्राम पंचायत अंतर्गत 10 से 15 गांव आते हैं। इन गांवो में पानी की समस्या को खत्म करने के लिए एमसीएल के सीएसआर फंड से 10 करोड़ रुपये का निवेश कर आरडब्ल्यूएसएस की मदद से संथपाड़ा ग्राम पंचायत , झरीयांबा में 45 लाख की क्षमता वाला जल विशोधनागार परियोजना बनाया गया है। इसका काम 2022 से पूरा हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत है कि अबतक परियोजना को लागू नहीं किया जा सका है। जिससे संबंधित ग्रामीणों को अभी तक शुद्ध से संबंधित इस परियोजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इस संबंध में पंचायत के ग्रामीणों ने स्थानीय उच्च पदस्थ अधिकारियों, जिला कलेक्टर, उपजिला कलेक्टर और आरडब्ल्यूएसएस के मुख्य अधिकारी को सूचित किया है, लेकिन इसपर क्या कार्यवाही की जा रही है कुछ पता नहीं चला है। यहां सवाल उठता है कि परियोजना पूरी होने के बाद भी सरकार की बसुधा पेयजल योजना से उक्त ग्रामीणों को किस कारण से बंचित रखा जा रहा है।
उक्त ग्रामीणो के घर में चर्चा का मुख्य विषय यह है कि प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विकासकर्ताओं के बीच तनातनी चल रही है। आने वाली गर्मी को देखते हुए सरकार पेयजल के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। इसलिए विभागीय अधिकारियों द्वारा तत्काल पेयजल समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इन चारों ग्राम पंचायतो के ग्रामीणो ने आने वाले दिनों में आंदोलन करने की चेतावनी दी है।





