यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से खतरे में मानवता

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से खतरे में मानवता
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से खतरे में मानवता

नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)

जंग तो चंद रोज होती है,

           जिदगी वर्षों तलक रोती है...

दुनियावी मुश्किलों का हल अगर जंग होती, तो दुनिया महाभारत युद्ध के बाद सदियों बाद विश्वयुद्ध -1 ,विश्वयुद्ध - 2 के अलावा दुनिया भर में लाखों बार लड़ी गई,अलग-अलग देशों और संगठनों के बीच की खूनी लड़ाईयों के बाद कम से कम आज तो दुनिया पूरी तरह से हर परेशानियों और विवादों से मुक्त हो गई होती।

लेकिन हुई नही।। क्योंकि कारण जानते हुए भी हमने इसे समझने की कोशिश कभी नही की। हम अक्सर युद्धों में मारे गए लोगों और जीती गई जमीनों की बात करते रहे,परन्तु हममें से किसी ने भी युद्ध मे अपनो को खो चुके और जिंदा लाश बने बचे हुए लोगों और उनकी सालों जिए जाने वाली गुमनाम- बदहाल जिंदगी की चर्चा कभी नही की। सम्भवतः उनकी तरफ पलट कर भी कभी नही देखा।। फिर कुछ सालों बाद नए युद्ध की तैयारी में लग गए।।

कमोबेश हिरोशिमा नागासाकी के बाद कीव से लेकर खारकीव तक पटी पड़ी लाखों इंसानों की लाशें,खंडहर हुए शहर,बारूद और गोलों से भरी हजारों एकड़ बंजर जमीन,मिलों पसरा मौत का भयावह सन्नाटा,सड़को पर पड़ी हजारों सैनिकों की आधी जली,कटी फटी लाशें उन्हें नोचते चील और गिध्द इतना कुछ देखकर भी इंसान सुधरने को तैयार नही है।। 

जबकि ऐसे भयावह मंजर और उसके सन्नाटे हमेशा चीख चीख कर हमसे कहते रहे, *रुको और सुनो युद्ध किसी भी समस्या का एकमात्र और अंतिम विकल्प नही है, ये बुरा है बहुत बुरा है। इसलिए बिना लड़े कुछ फैसले साझा हित में करने की तरफ बढ़ो।

एक सैनिक का अंतिम संदेश, देखे विडियो-

हिमांशु जी कहते है..

जानवरों ने नैतिक शिक्षा की किताब नहीं पढ़ी,
जानवरों ने नागरिक शास्त्र नहीं पढ़ा समाज विज्ञान नहीं पढ़ा,
जानवरों ने धर्म की शिक्षाएं नहीं पढ़ीं,
इतिहास नहीं पढ़ा ना उनके पास भविष्य जानने के लिए ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान है,
फिर भी चिड़ियों ने चिड़ियों को मारने के लिए कोई तरकीब नहीं खोजी,
शेरों ने शेरों को मारने के लिए बंदूकें नहीं बनाईं,
हाथियों ने हाथियों को मारने के लिए बम नहीं बनाए,
हमने जिन्होंने नागरिक शास्त्र इतिहास समाजशास्त्र नैतिक शिक्षा धार्मिक किताबें सब पढ़ ली थी,
हमने बम वर्षक विमान बनाए,
ऐसे परमाणु हथियार बनाए जिससे हम सारी दुनिया के सभी इंसानों को कई सौ बार कत्ल कर सकें,
जबकि हमारा दावा है कि हम जानते हैं कि नफरत से प्यार बेहतर है,
हिंसा के मुकाबले अहिंसा श्रेष्ठ है,
लालच की बजाए संतोष में सुख है,
लेकिन हम सब जानकर भी ऐसे हैं..,
और हम कहते है कि हम जानवरों से बेहतर जीव इंसान है,,

*युद्ध और उसकी विभित्सिका को समझने के लिए अजमल की चंद पंक्तियां अवलोकनीय है...*

गिनती सीखो--

पाँच मरे हैं इस टोली के आठ मरे हैं दुशमन के

यानी तीन से आगे है अब हमारी टोली

बीस मकान गिरे हैं अपने

पंद्रह घर ही दुश्मन के हम ढा पाये हैं

पाँच घर अब भी पीछे हैं हम

छह घर और गिराने हैं बस फिर हम जीते

इक बुढ़िया है, इक बच्चा है, इक पत्नी है, इक महबूबा

पागल हैं यह, इनको गिनती तक नहीं आती

एक मरा है सिर्फ़, मगर मातम तो देखो

कहते हैं कि दुनिया उजड़ी

इनको मैंने समझाया भी, दुशमन की लाशें ज़्यादा हैं

यह नहीं समझे, 

मूरखों को अब क्या समझायें

झुकी कमर को पता नहीं है

यतीम बच्चा गिन नहीं पाया

राह को तकती मुर्दा आँखें गणित न समझीं

टी वी में भी हम जीते हैं दुश्मन हारा

मूरखों को पर क्या समझायें

" एक" का मरना कुछ भी नहीं है

"एक" का मतलब "सब" नहीं होता

एक के मरने से दुनिया नहीं उजड़ा करती

"एक" कभी दुनिया नहीं होता

काश इन्हें भी हम जैसी ही गिनती आती

तो यह भी रोने के बजाये ताली बजाते! हँसते रहते

गिनती सीखो ! हँसना है तो गिनती सीखो!

(संकलन/साभार सोशल मिडीया)

गौर से देखिये जिन सैनिकों के दम पर हम लड़ाई लड़ते है या जितने का दावा करते है वो सैनिक या जवान(जो किसी का बेटा है किसी का पिता है किसी का भाई किसी का पति किसी का दोस्त और किसी कोई का रखवाला और जाने कितनों का पेट भरने वाला होता है)वो भी किसी को मारकर किसी की जमीन या दौलत छीनना नही चाहता।।

फिर क्यों किस लिए किसके लिए लड़ा जाता है युद्ध?? 

*आइये अब तो हम युद्ध मुक्त विश्व की तरफ बढ़ें।। माना कि ये मुश्किल जरूर है,परन्तु अंसभव नही।।*