गिरती पत्रकारिता के स्तर पर दो शब्द 

गिरती पत्रकारिता के स्तर पर दो शब्द 

रामप्रवेश चौधरी

एक पत्रकार को निष्पक्ष होना चाहिए, सच्चे मायने में पत्रकारिता का अर्थ निष्पक्ष पत्रकारिता से लगाई जाती है। जब भी कोई समाज या कानून से पिडित होता है तो वह इंसाफ के लिए सारी उम्मीद मिडिया से ही लगाता है। मीडिया ऐसे कई लोगो के लिए उम्मीद की किरण है।

पर वर्तमान समय में मीडिया का अर्थ धीरे धीरे बदल रहा है, आज की तारीख में पत्रकारिता का पेसा भी बदनाम होने लगा है। 

यूं तो मीडिया को समाज का आइना कहा जाता है पर "सारांश दैनिक" के संपादक रामप्रवेश चौधरी की यह टिप्पणी आज की पत्रकारिता को ही आईना दिखा रहा है। 

मैं रामप्रवेश चौधरी(पत्रकार) अपने पत्रकारिता के  11 वर्ष के अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि पत्रकारिता का मतलब होता है कि निष्पक्ष खबरें बताई जाए। 
लेकिन कोई भी पत्रकार ऐसा करता नहीं दिखाई देता, सभी पत्रकार हमेशा एक एजेंडे के तहत खबरें परोसते है। आज की तारीख में कोई भी निष्पक्ष पत्रकार नहीं है-यह मेरी निजी बिचार है।

पत्रकार भी राजनीति के रंग में रंगकर दो हिस्सो में बंट चुके है, सत्ता पक्ष पत्रकार और विपक्षी पत्रकार। 
सरकार विरोधी पत्रकार हमेशा सरकार के विरूद्ध नकारात्मक पत्रकारिता करते हैं और सरकार के पक्षधर पत्रकार हमेशा सरकार के पक्ष में साकारात्मक पत्रकारिता करते हैं।
ऐसे ही लोगो का बंटवारा होता है, सरकार विरोधी लोग हमेशा नाकारात्मकता वाली खबरे पढ़ते और देखते है,। जबकि सरकार पक्ष के लोग हमेशा साकारात्मकता वाली खबरे पढ़ते और देखते है।
और दोनो पक्ष के पत्रकार और देखने वाले लोग सोचते हैं कि देश में कुछ बदलाव होने वाला है, बस हम सही है।
लेकिन ऐसा होता नहीं है, क्योंकि यह मानव की प्रवृति है। जिसको जो अच्छा लगता है, वह उसे ही देखता और सुनता है।
बाद मे कोई क्रांति नहीं आती है, केवल निराशा ही हाथ लगती है। क्योंकि  सबकुछ पहले से तय (फिक्स) है।
इसलिए दोनो पक्षों की पत्रकारिता देखिए, तब जाकर अपने हिसाब से सरकार का चुनाव कीजिए।
किसी को भक्त और चमचा कह देने भर से कुछ हासिल नहीं होने वाला है, ऐसा कहकर आपसी संबंध मत बिगाड़िए।
मानव को भगवान ने इतना सक्षम और समझदार बनाया है कि वह खुद से ही सही और गलत सरकार का चुनाव करना जानता है।
और जो आप तक सिर्फ नेताओं के भाषणों को पहुंचाते उन्हें पत्रकार मत समझिए। आज पत्रकार कम व्यवसायिक ज्यादा है। खबरों के व्यवसायिक। (आप मुझे भी इसी श्रेणी में ले सकते हैं )

पत्रकारिता को व्यापार बनने से रोकना होगा। इसके लिए पत्रकारिता का मानक तय किया जाना आवश्यक है।