बंडामुंडा़ में मनाई गई रानी लक्ष्मीबाई जयंती
लखन लोहार (संवाददाता)
चमक उठी सन् 57 में वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेलो हरबोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लडी़ मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी!!
उक्त पंक्तियां झाँसी के उस बिरांगना के लिए हिन्दी के प्रख्यात कवित्रि सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई थी जिसने अपने बच्चे को पीठ पर बांध कर युद्ध के मैदान में अंग्रेजो को धूल चटा दी थी।
मरणोपरांत भी उनकी देह को अंग्रेज़ छू भी ना सके। ऐसी बीरांगना रानी लक्ष्मीबाई आज भी महिलाओं की प्रेरणा श्रोत बनी हुई हैं । भारत के कोने कोने में 19 नवंबर को उनकी जयंती मनाई जाती है। इसी क्रम में बंडामुंडा़ के सी सेक्टर में रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाई गई।
जिसमें पुरूष और महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर भागीदारी की।





