पूर्व IAS अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजद में शामिल

पूर्व IAS अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजद में शामिल

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

नौकरशाही से अलग होने के लगभग पंद्रह महीने बाद पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन ने सार्वजनिक जीवन में एक नई राजनैतिक पारी की शुरुआत की है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के अत्यंत करीबी रहे नौकरशाह से राजनेता बने वी.के. पांडियन की पत्नी सुजाता आज (25 जून) को औपचारिक रूप से बीजू जनता दल (बीजद) में शामिल हो गई। वर्ष 2000 बैच की ओडिशा कैडर की 51 वर्षीय सुजाता राउत कार्तिकेयन आज (25 जून) बीजू जनता दल सुप्रीमो नवीन पटनायक की उपस्थिति में बीजद में शामिल हो गईं। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद पिछले वर्ष स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली थी।

दल की सदस्यता दिलाने के अवसर पर नवीन पटनायक ने कहा, “मैं सुजाता राउत का बीजद में स्वागत करता हूं। वह पार्टी की एक साधारण सदस्य के रूप में शामिल हो रही हैं। उन्होंने आईएएस अधिकारी के रूप में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। अपने अंतिम दायित्व में उन्होंने राज्य की बड़ी संख्या में महिलाओं के कल्याण से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया था। मुझे विश्वास है कि समय के साथ वह अपनी नई भूमिका में लोगों, विशेषकर महिलाओं की सेवा करना और अधिक प्रभावी ढंग से सीखेंगी।”

वंही दूसरी ओर सुजाता राउत कार्तिकेयन ने कहा, “पार्टी में शामिल होकर मुझे श्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा की सेवा करने का एक और अवसर मिला है। भगवान जगन्नाथ, पार्टी नेतृत्व और लाखों कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से मैं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ओडिशा की जनता के लिए कार्य करूंगी।”इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए नवीन पटनायक ने कहा, “मैं मीडिया और सभी लोगों की जानकारी के लिए फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि आगामी चुनावों (2029) में बीजद का नेतृत्व मैं ही करूंगा।”राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सुजाता राउत के केवल एक साधारण सदस्य के रूप में पार्टी में शामिल होने तथा नवीन पटनायक द्वारा अगले चुनाव में स्वयं नेतृत्व करने की घोषणा ने बीजद में उत्तराधिकार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। पार्टी का एक वर्ग सुजाता के बीजद में शामिल होने से नाराज हैं। आज दल में शामिल होने के समय कई वरिष्ठ नेता अनुपस्थित रहे। विरोध करने वाले एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सुजाता का बीजद में शामिल होना ऐसा होगा, मानो पार्टी की कमान फिर से पांडियन के हाथों में सौंप दी जाए।

उन्होंने कहा कि पांडियन द्वारा पार्टी के कामकाज संचालित करने के तरीके को लेकर बीजद के भीतर व्यापक असंतोष रहा है। नेताओं का आरोप है कि इसी वजह से वर्ष 2024 के चुनावों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे से पांडियन द्वारा बीजद संगठन का संचालन जारी रखने के कारण सभी स्तरों पर नेताओं का बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ना जारी है। उन्होंने कहा, "पार्टी के कई राज्यसभा सदस्य पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और इस्तीफों का सिलसिला लगातार जारी है।" उनका दावा है कि सुजाता के बीजद में शामिल होने के बाद यह प्रवृत्ति और तेज हो सकती है।

 

 

वैसे सुजाता कार्तिकेयन का प्रशासनिक करियर काफी उल्लेखनीय रहा है। वे कटक और सुंदरगढ़ जिलों की कलेक्टर रह चुकी हैं तथा विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

राजनीतिक विश्लेषक, सुजाता के बीजद में सक्रिय होने को वी.के. पांडियन की पार्टी में प्रभावशाली भूमिका की संभावित वापसी के संकेत के रूप में भी देख रहे है। पांडियन ने 2024 के चुनावों में बीजद की हार के बाद सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की थी।