पुलवामा हमले की पांचवी वर्षी

पुलवामा हमले की पांचवी वर्षी

नितिन सिन्हा (संपादक : खबरसार) 

पुलवामा में शहीदों ने पीठ पीछे छुपकर हमला करने वाले कायर चरमपंथियों के कथित फिदायीन हमले में अपनी शहादत दी थी.पुलवामा 2019 देश के शांतिकाल में बिना दुश्मन से लड़े इतनी बड़ी संख्या में सैनिको/जवानों के शहादत की सबसे बड़ी घटना थी..हमले के बाद जहां एक ओर पूरा देश कागजी शेर कही जाने वाली केंद्र सरकार के विरुद्ध आक्रोश में था,तो वहीं दूसरी ओर,मीडिया मैनेज करने वाली केंद्र सरकार और उसके असफल सूचना तंत्र पर भी कई सवाल उठ रहे थे.ये सभी ऐसे सवाल थे,जिनमें से अधिकांश का सरकार ने अब तक जवाब नहीं दिया है.और शायद आगे देना भी नही चाहेगी।।।

पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ उठे सवालों में यह कुछ प्रमुख सवाल थे, जिनका पूछा जाना हर जागरूक भारतीय नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी बनती है...

हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल ने कहा था कि हमें इंटलीजेंस इनपुट तो मिले थे,लेकिन उसे 'नज़रअंदाज़' किया गया. 

1.ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि अगर हमले से जुड़ी इंटेलीजेंस जानकारियां मिली थीं तो उन्हे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया??

2.इस जानलेवा लापरवाही के लिए आखिर दोषी किसे ठहराया गया.??

3.क्या निर्दोष 44 जवानो के जान की सुरक्षा केंद्र सरकार या सिस्टम की जिम्मेदारी नही थी.??

4.इतने बड़े हमले की तैयारी में महीनों का समय लगता है,अगर इस दौरान सेना को या गृह मंत्रालय को ऐसे किसी हमले की कोई भनक नहीं लगती है तो ये क्या भारत के ख़ुफ़िया तंत्र और केंद्र सरकार पूरी तरह से निक्कमी है.??

5.जम्मू-श्रीनगर हाइवे उन सड़कों में शामिल है जहां देश के सबसे कड़े सुरक्षा मानक लागू हैं.इस हाइवे में थोड़ी-थोड़ी दूरी में सभी आम गाड़ियों की कड़ी जांच की जाती है.ऐसे में आख़िर विस्फोटक से भरी कोई गाड़ी हाइवे की कड़ी सुरक्षा को चकमा कैसे दे सकी?

6.250-300 किलोग्राम विस्फोटक आख़िर हमारे देश भारत में आया कैसे,और अगर बाहर से नहीं आया तो इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक हमलावरों के हाथ किस तरह से लगा.?

7.78 गाड़ियों के काफ़िले को एक साथ ले जाने के पीछे ख़राब मौसम को कारण बताया जा रहा है.तो क्या 2547 जवानों की संख्या वाले इस बड़े काफ़िले को एयरलिफ़्ट नहीं किया जा सकता था.?

8.तमाम खतरों के बावजूद वर्षों से जवानों के डिप्लॉयमेंट के उक्त तरीके को क्यों नही बदला गया.??

रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल डी.एस हुड्डा ने साल 2016 में भारत की ओर से पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक का नेतृत्व किया था.पुलवामा हमले के बाद उन्होंने सवाल उठाया कि *"ये संभव ही नहीं है कि इतनी ज़्यादा मात्रा में विस्फ़ोटक सामग्री बिना किसी बड़े सरकारी तंत्र की सहायता के सीमा पार से हमारे देश के अंदर आ जाए.जरूर घर के भेदियों ने इस हमले में आतंकियों को सहयोग किया है।"

क्या टी वी और मोइबल स्क्रीन में मजबूत और सक्षम  दिखने वाली केंद्र सरकार आज तक उन भेदियों को खोजने की क्षमता नही रखती है?

वहीं पुलवामा मामले में विशेषज्ञों कि माने तो इस घटना के पीछे इंटलीजेंस फेलुवर से ज्यादा राजनीतिक षड्यंत्र के साक्ष्य देंखने को मिलते हैं।