दानवों का स्वर्ग बना देवभूमि
नितिन सिन्हा (संपादक-खबर सार)
काहे की देवभूमि ये तो राक्षसों का स्वर्ग है....... सोचिये और बताइए,जिस देश में 13 साल की मासूम से 35/35 लोग बेखौफ बलात्कार करते हों,,और मासूम को न्याय पाने के लिए अस्पताल में मरना पड़ता हो,,उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे??
जिस देश में एक तरफ नेता धर्म और जाति,मंदिर_मस्जिद के नाम पर चुनाव जीतते हो,,मंदिरों की संपत्तियाँ चोरी करते हों,,दूसरी तरफ राम और गाय के नाम पर सड़कों पर खुली हिंसा करते हो उसे आप देव भूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे.??
जिस देश में सत्ता में बने रहने के लिए सत्ताधारी नेता अपनी ही पार्टी के राजनीतिक सिद्धांतों को तिलांजलि देकर,, अपनी सरकार को अवसरवादी और अपरधियों का समूह बना लेते हो,, उस देश को आप देव भूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे.??
जिस देश की ताकत उसके युवा सड़को उतकर,,हमारे आपके बच्चों का भविष्य बचाने संघर्ष कर रहे हों,, जहाँ साल दर साल पेपर लीक हो रहे हों,,और हमारा नेता 8500 करोड़ के जहाज में आए दिन विदेश घूमता हो उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे..??
आजादी के 75 सालों के बाद भी जिस देश के 60 प्रतिशत नागरिक मुफ़्त के सरकारी राशन के भरोसे जिंदा हो और नेता खुले बाजार में 15_15 करोड़ रु में खरीद_बिक रहे हो,,उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे..??
एक तरफ जिस देश के मुट्ठी भर उद्योगपतियों को लाखों करोड़ों का सरकारी कर्ज माफ हो जाता हो और देश भर के खनिज संसाधन मुफ्त में मिलते हो,,,दूसरी तरफ जिस देश के सैकड़ों किसान हर साल कुछ हजार रु. कर्ज के फेर में अपनी जान दे देते हों उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे..??
जिस देश का सिस्टम और वहां की न्याय व्यवस्था सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में डूबकर, पक्षपाती और सत्ता समर्थक हो गई हो,,जहां न्याय पाना महाभारत की जंग जितना कठिन और दुष्कर हो,, उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे..??
जिस देश में बलात्कारी, अपराधी,हत्यारे और रंगबाज लोग सांसद,विधायक और मंत्री चुने जाते हो,,जहां सत्ता से सवाल पूछना देशद्रोह की श्रेणी में आता हो,,जहां सत्ता के समर्थन से भीड़ तंत्र सड़क पर अपने हिसाब से न्याय अर्थात लिचिंग करती हो,,जहां बिलकिस बानो के अपराधियों को सत्ता संरक्षण देती हो,, जहां सत्ता गौमांस कारोबारियों से चंदा खाती हो,,जहां कि अदालतें सत्ता के पक्ष में फैसले करती हो,,या अपराध की परिभाषा घमंडी जज आपने हिसाब से तय करते हो,, जहां हर 15/20 मिनट में एक दुष्कर्म की घटना घटती हो,, उसेआप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे..??
जिस देश की राजनीति का चाल,चरित्र और चेहरा सिर्फ़ सत्ता में बने रहना,,और इसके लिए विपरीत विचारों वाले विपक्ष के नेताओं को धनबल से खरीदना,दबाव बनाना या उनके विरुद्ध सड़क पर खुली हिंसा गाली_गलौज सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग करना बन गया हो,,जहां राजनीति का धर्म समाज के हित में नहीं बल्कि बल पूर्वक राज_पाठ करने पर केंद्रित हो,,*उसे आम देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे.. ??*
जिस देश में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों का बाजार वाद हो गया हो,,जहां करोड़ो पढ़े लिखे छात्र रोजगार के लिए दर _दर भटकते हों,,जहां पैसों की कमी से और सरकारी अस्पतालों में संसाधनों में अभाव में मरीज अस्पतालों के बाहर दम तोड़ देते हो,,उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे.. ??*
जिस देश में नेताओं के तो घर करोड़ो अरबों रूपये खर्च कर बने हो,, परंतु बहुतायत आम नागरिक को खुले आसमान में,जंगलों में, झोपड़ियों में या स्लम रहना पड़ता हो,,जहां करोड़ो अरबो रुपए खर्च कर बनाई हुई सड़के चंद महीने नहीं टिकती हों,,जहां सड़क हादसों हर रोज सैकड़ों जाने जातीं हो,,जहां पुल_पुलिया ताश के पत्तों की तरह पहली बारिश में बह जाती हो *उसे आप देवभूमि कहेंगे या राक्षसों का स्वर्ग कहेंगे ये आप पर निर्भर करता है...*
सच कहूँ तो मुझे अब शर्म आने लगी है कि मैं और मेरे बच्चे आज एक ऐसे माहौल में रहने को मजबूर है,,जहां मुझ जैसे आम नागरिक को सुरक्षित और सम्मान से जीने का जगह शेष नहीं बची है,,हम सिर्फ बेहिसाब सरकारी टैक्स भरने और दूषित और जहरीली हवाओं के बीच सांस लेने,, *दुर्घटनाओं से भरी घटिया और स्तरहीन सड़को भारी टोल देकर पर यात्रा करने*,,गंदा पानी पीने,,बेटे को नौकरी के संघर्ष करने या पुलिस की लाठी खाने और बेटी को राह चलते वहशी गुंडों से बचाने की चिंता से ग्रस्त है,,,हम कैसे अपने आप को तसल्ली देने के लिए झूठ मूठ का कह दें कि यह वही देवभूमि है,,जहां कभी देवता भी रहने को तरसते थे,,जहां न्याय सर्वसुलभ था,,जहां स्त्रियों का सम्मान और सुरक्षा समाज की प्राथमिकता थी,,जहां जाति और धर्म के नाम खूनी हिंसा नहीं थी,,जहां किसान सुखी और संपन्न थे,,जहां कि नदियाँ स्वच्छ और अविरल थीं,,जहां के पर्वत_पहाड़ जंगलों से भरे थे,,जहां हर घर के आंगन में सोने की चिड़िया खेला करती थी।।..





