जोबाघाट में बिरसामुंडा़ जयंती मनाई गई

जोबाघाट में बिरसामुंडा़ जयंती मनाई गई

आज बिरसामुंडा़ जयंती के अवसर पर बिसरा ब्लाक के जमसेरा पंचायत अंतर्गत जोबाघाट में अमर शहीद बीर बिरसामुंडा जयंती मनाने की शुरुआत की गयी। 

जोबाघाट में इस कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय लोगो को संगठित करने की कामना से की गई, इस कार्यक्रम के संयोजन में गाँव के अधिवक्ता संजय मुंडारी,सोमनाथ खडिया, रंजित टोप्पो,  सानी मेंडारी,बिजय तांति, गणेश तुर्की,   आदि लोगो का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

बिरसामुंडा़ का जन्म मुंडा जनजाति के गरीब परिवार में हुआ था। पिता-सुगना पुर्ती(मुंडा) और माता-करमी पुर्ती(मुंडाईन) के सुपुत्र बिरसा पुर्ती (मुंडा) का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु ग्राम में हुआ था। साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढाई के बाद इन्होंने चाईबासा जी.ई.एल.चर्च(गोस्नर एवंजिलकल लुथार) विधालय में पढ़ाई किये थे। इनका मन हमेशा अपने समाज की यूनाइटेड किंगडम,ब्रिटिश शासकों द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचते में लगा रहता थे। उन्होंने मुण्डा मुंडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिये अपना नेतृत्व प्रदान किया।1894 में मानसून के छोटा नागपुर पठार, छोटानागपुर में असफल होने के कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। आपदा की इस घड़ी में बिरसा ने पूरे मनोयोग से अपने लोगों की सेवा की।

1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके चाहने वाले लोगों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। अगस्त 1897 में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूँटी थाने पर धावा बोला। 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से आदिवासी नेताओं की गिरफ़्तारियाँ हुईं।

जनवरी 1900 डोम्बरी पहाड़ पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत सी औरतें व बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियाँ भी हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल से अंग्रेजों द्वारा गिरफ़्तार कर लिया गया। और 9 जून 1900 ई को आंग्रेजों द्वारा जहर देकर मर गया | आज भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को भगवान की तरह पूजा जाता है।

बिरसा मुण्डा की समाधि राँची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका एक प्रतिमा भी लगाई गई है। उनकी स्मृति में रांची में बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार तथा बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र भी है। ओडिशा के राउरकेला शहर में भी एक मुख्य चौराहा बिरसामु़डा के नाम से रखा गया है, इस चौराहे में वीर बिरसामुंडा़ की एक ब

विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। यहाँ प्रत्येक वर्ष बिरसामुंडा़ जयंती एक उत्साह की तरह मनाया जाता है।