गुरू पूर्णिमा पर अयोध्या धाम में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

गुरू पूर्णिमा पर अयोध्या धाम में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

धरमेंद्र कुमार सिंह (रिपोर्टर) 

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अयोध्या धाम में कई स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिनमें-हनुमानगढ़ी के संकटमोचन स्थल पर गुरु पूर्णिमा का भव्य आयोजन किया गया था। यहाँ संत समाज और गृहस्थ भक्तों ने गुरूओं से आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर संजय दास जी महाराज ने गुरु की महिमा और जीवन में उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि –"गुरु वह दीप है जो अज्ञान रूपी अंधकार को हटाकर जीवन में प्रकाश फैलाता है।" 


समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी द्वारा  एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने कहा कि समाज के हर वर्ग और हर व्यक्ति के जीवन में एक गुरु का होना अनिवार्य है। गुरु का होना समाज में प्रकाश की ज्योति का प्रतीक है, जो हमें सही मार्ग दिखाता है।

इस अवसर पर, समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी जी के निर्देशन में गुरु के सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उन्होने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से, हम गुरु के महत्व को समझने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रयास करेंगे। समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी जी का यह प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

समाजसेवी तुषार गोयल की ओर से गुरू के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि - गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, आइए हम अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करें। गुरु का स्थान हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो हमें ज्ञान, संस्कार और सही मार्ग की दिशा दिखाते हैं। आइए, उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएं।

वहीं स्पार जियो डेवलपर के प्रबंध निदेशक सतीश राम कुमार गोयल द्वारा एक विशेष आयोजन किया गया था। श्री गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि- गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। इस अवसर पर, हमने अयोध्या, दिल्ली और राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें गुरु महिमा और उनके विचारों को साझा किया जाएगा।

गुरु का स्थान हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो हमें ज्ञान, संस्कार और सही मार्ग की दिशा दिखाते हैं। आइए, हम अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करें और उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करें।