उषा सर्वे कंपनी द्वारा ठगे गए कर्मचारी
हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक)
राउरकेला नगर निगम के तहत चल रहा ओड़िशा सरकार का आवास एवं विकास परियोजना उषा सर्वे का काम बस्ती अंचल मे चल रहा है
उषा सर्वे का काम एक निजी कंपनी (STESALIT)को दी गई है। यह कोलकाता की कंपनी है। इस कंपनी की और से सोमनाथ घोष, मनोज चक्रवर्ती, ओर सुब्रत रोय, उषा सर्वे का काम कराने के लिए राउरकेला के स्थानीय युवक और युवतियो को नियुक्त किया था।
उषा सर्वे का काम के लिए नियुक्त सभी युवक युवतियो को परामर्श शुल्क, मासिक ₹10000, एवं वाहन के लिए इंधन (पेट्रोल) और भोजन के लिए ₹5000 दिए जाने की बात लिखित /मौखिक रूप मे बताया गया था। इसके साथ साथ यह भी बताया गया था की सर्वे का काम करने वाले सभी कर्मचारीयो को परिचय पत्र (Stesalit) कंपनी की ओर से दिया जायेगा।और राउरकेला नगर निगम के साथ किया गया करार की प्रति दिखाई जाएगी।प रंतु उषा सर्वे मे कर्मचारीयों द्वारा अपने काम करने के दौरान कई बार परिचय पत्र और करारनामा की प्रति की मांग किए जाने के बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा उनकी यह मांग पूरी नहीं की गई।
उषा सर्वे मे कर्मचारीयों के महिना भर से अधिक समय तक काम करने के बाद वेतन न मिलने पर कर्मचारियों ने अपना वेतन मांगना आरंभ कर दिया तो कंपनी द्वारा कुछ राशि यूपीआई (UPI) के माध्यम से भेज दिया गया और बाकी बची धनराशी को देने से यह कहकर टाल दिया गया कि अभी कंपनी को नगरनिगम से वेतन के पैसे नही मिले है। सी तरह से का वेतन देने में करीब 2 महीना टाल मटोल करने के बाद, उषा सर्वे में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा Stesalit कंपनी के कर्मचारी को फ़ोन व मैसेज करने पर अब वे किसी तरह का जवाब नहीं दे रहे थे। इन लोगों के उषा सर्वे ऐप में आईडी (ID) ब्लॉक कर दिया गया, उषा सर्वे व्हाट्सप्प ग्रुप से हटा दिया गया।इसी तरह कंपनी की ओर से कर्मचारियों के साथ व्यवहार किए जाने से कर्मचारियों को उनके साथ धोखाधड़ी होने का एहसास होने लगा। तो कर्मचारियों के इस स्थिति से अवगत होने के बाद "सेव ओडिशा" संस्था के अध्यक्ष नवीन गुप्ता नगर पालिका कमिश्नर से मुलाकात कर कर्मचारियों के साथ हुई धोखाधड़ी के संबंध में जल्द से जल्द कंपनी के ऊपर कार्यवाही करने की मांग की।





