स्वतंत्रता सेनानी रेंडो माझी का 168वां शहीद दिवस मनाया गया
सुशांत मल्लिक (संवाददाता)
स्वतंत्रता सेनानी रेंडो माझी का 168वां शहीद दिवस उनकी जन्मस्थली लुबेनगढ़ में मनाया जा रहा है।
आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी रेंडो माझी का जन्म कालाहांडी जिले के मदनपुर रामपुर जैसे आदिवासी बहुल अंचल से घिरा एवं जंगलो, पहाडों से अच्छादित लुबेनगढ़ में हुआ था। पिता का नाम डंगा माझी तथा माता का नाम इरफुली माझी था। रेंडू माझी को 1800 के दशक में कालाहांडी जिले का एक आदिवासी योद्धा कहा जाता था, वे एक वीर व्यक्ति थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान कई बार लड़ाई लड़ी। और अंततः उन्होंने अपनी भूमि, अपने जिले और ओडिशा के लिए लड़ाई लडते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया।उनकी लडाई का मुख्य कारण यह था कि अंग्रेज़ सरकार के समय में आदिवासियों से उनके क्षेत्रों के अधिकार और राजस्व को जबरन छीन लिया गया था। इसके विरोध में रैंडो माझी को कई सहयोगियों जैसे चक्र बिशोई, ताड़ दंबा, मार्ना माझी, का समर्थन प्राप्त था। रैंडो माझी के आह्वान पर कई आदिवासी लड़ाकों ने अंग्रेजों से लड़ाई की। लेकिन रैंडो माझी हमेशा अपनी जमीन के अधिकार के लिए अंग्रेजो से लड़ते रहे। इसके लिए उन्हें अंग्रेजो द्वारा गंजाम जिले के रसूल कुंडा जेल में कैद कर दिया गया। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और अंत तक अपनी हक के लिए जिद पर अडे रहे। अंग्रेजों द्वारा शहीद माझी 10 दिसंबर, 1855 को पकड़ लिया गया,जिसके बाद उन्हें उरलादानी गांव में फांसी दे दी गई।
और वह अपने अंचल की धरती पर शहीद हो गए। उनके उत्तराधिकारी रामा माझी और जुगेश्वर माझी को उनकी जिम्मेदारी के रूप में देखें तो हम कह सकते हैं कि रांदो माझी कालाहांडी की धरती पर जन्में एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जो लोगों की यादो में हमेशा जीवंत है। उनकी जन्म भूमि लुबेन गढ़ और उनकी मृत्यु स्थली उरलदान में उनके जन्म दिवस को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अफसोस की बात यह है कि जब पूरा गाँव शहीद माझी का जन्मदिन के जश्न में डूबा हुआ था मौके पर कोई भी स्थानीय राजनेता या स्थानीय मंत्री देखा नही गया। लेकिन यह गर्व की बात है कि इस वर्ष एम रामपुर राज परिवार के युवा सामाजिक कार्यकर्ता निल माधव सिंह देव उपस्थित थे। रेंडो माझी का 168वां शहीद दिवस उनके जन्मस्थल पर बड़े धूमधाम से मनाया गया और इस वर्ष कालाहांडी विकास परिषद के अध्यक्ष शिवाजी माझी, पुष्पेंद्र सिंह देव, सत्य नारायण पटनायक सेवाजगत एम. रामपुर, रोदन मल्लिक विशेष विकास परिषद के अध्यक्ष कंधमाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
आप सभी जानते हैं कि निरंजन बिशी एक आदिवासी मंत्री हैं,इनके अलावे भी कई आदिवासी मंत्री और नेता अब सत्तारूढ़ दल में हैं। कालाहांडी के पूर्व मंत्री दिब्या शंकर मिश्रा या नरला विधायक भूपिंदर सिंह इस कार्यक्रम में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। लेकिन भवानीपटना के कई नेता और मंत्री मौके पर मौजूद देखे गए।
यहां सवाल उठता है कि जिला प्रशासन और नेता रेंडो माझी के जन्म की मिट्टी और बलिदान की मिट्टी को क्यों भूल रहे हैं।अब देखना यह है कि कितनी जल्दी इस शहीद की धरती और लुबेन गढ़ के 17 गांवों में विद्युतीकरण होगा और इन पंचायतो में राज्य सरकार की लक्ष्मी बस सेवा मिलती भी है या नहीं।





