बेबसी लालच स्वार्थ या षड़यंत्र क्या है हकीकत गणेश बस्ती की
हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक)
राउरकेला : राउरकेला के सेक्टर 18 (आमबगान)के निकट रिंग रोड़ के किनारे गणेश बस्ती के लोग महिलाओं और बच्चों को आगे करके हाथो में तख्ती पकड़े प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे समय में जब विश्व के कई देशों से लोग राउरकेला शहर आए हुए है, शहर के प्रसिद्ध बाजार स्थान पर इस तरह का प्रदर्शन करके शहर ही नही अपितु देश को बदनाम करने का काम कर रहे है। यह प्रदर्शन विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाता राउरकेला को बदनाम करने का षड़यंत्र नही तो और क्या है। और इस षडयंत्रकारीयो के पक्षकारो को भी इसमें बराबर का दोषी क्यों नहीं माना जाना चाहिए।
राउरकेला इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार कुछ लोग अनधिकृत रूप से आमबगान के पास गणेश बस्ती में संयंत्र प्रबंधन द्वारा माना करने के बावजूद लम्बे समय से रहते आ रहे थे।
जबकि राउरकेला इस्पात संयंत्र उस जगह पर पार्क बनाना चाहती है। यहाँ रह रहे लोगों को संयंत्र प्रबंधन की ओर से कई महिने पहले सूचना भी दी गई थी। जिसके बाद संयंत्र प्रबंधन की ओर से मुहैया की गई सेक्टर 6 स्थित जामटोली और विवेकानंद बस्ती में गणेश बस्ती से रहने के लिए 115 परिवार चले गए।
पर 25-30 परिवार जो इस समय सड़क किनारे प्रदर्शन कर रहे है ये लोग यही बसने की जिद पर अडे़ है। जबकि इनके लिए सेक्टर 6 के विवेकानंद बस्ती और जामटोली के अलावा कोयलनगर के पीछे भट्टा बस्ती में संयंत्र प्रबंधन की ओर से घर बनाने के लिए जगह उपलब्ध कराया गया है। घर निर्माण होने तक इनके रहने के लिए अस्थायी आश्रय स्थली भी बनाई गई है। फिर भी ये लोग तीन स्थान पर दी जा रही जगह को ठुकराकर गणेश बस्ती में ही बल पूर्वक या भावनात्मक रूप दिखाकर रहने की जिद क्यों कर रहे है, क्या है इसके पीछे की वजह और इन लोगों के पक्ष में खड़े हुए लोगों की नीयत यह जानना आवश्यक है?

गुप्त सूत्रों की माने तो सड़क किनारे हाथों में तख्ती लेकर
कड़ाके की ठंड़ में भावनात्मक रूप से खूद को बेबस बताने वाले ये लोग असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो सकते है। आमबगान बाजार से लगे होने के करण असामाजिक गतिविधियों से इनकी आमदनी भी अच्छी हो जाती थी। कुछ लोगों का कहना है कि आमबगान बाजार में भीख मांगने वाले बच्चे इसी बस्ती के है। एक कारण यह भी हो सकता है कि यह एक किमती भू-खण्ड़ है।
तो कुछ इसे विश्वकप हाकी और आगामी चुनाव को लेकर राउरकेला में आए विदेशीयो के सामने स्थानीय प्रशासन और सरकार को बदनाम करने की साजिश बता रहे है। तो कुछ इस प्रदर्शन को राजनैतिक स्टंट भी बता रहे है। सच्चाई जो भी है एक दिन सामने आना ही है।
पर इस समय ऐसी ओछी हरकतों से विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाता राउरकेला शहर की तस्वीर धूमिल हो सकती है।





