रेलवे स्टेशन के पार्किंग में कितनी सुरक्षित है आपकी गाड़ी
राउरकेला के रेलवे स्टेशन पार्किंग में रखी जाने वाली गाडीयां कितनी सुरक्षित है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, गाडीयों के लिए कोई छत नहीं है। कडी धूप हो या मूसलाधार बरसात हो या फिर कडकते ठंड की ठण्डी शीत और धूल यह सबकुछ पार्किंग की गाडियों को सहन करना पड़ता है। राउरकेला रेलवे स्टेशन की पार्किग एक ऐसी पार्किंग है जहाँ गाडीयां कई दिनों तक खड़ी रहती है। यहाँ वे लोग अपनी गाडीयां रखकर जाते है जो लोग ट्रेन से कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर जा रहे होते है और वापस लौट कर अपनी गाड़ी लेकर घर जाते है। जब वे वापस आते है तो पाते है कि उनकी गाड़ी शीत या बरसात के पानी से लतपत है और ऊपर से धूल की मोटी परत जमीं हुई है। सब्त है तो इतना कि उसकी गाड़ी चोरी नही हुई। सवाल यह उठता है कि गाडियों का सही रख रखाव होना चाहिए था। जिसकी पूरी जिम्मेदारी पार्किंग संचालक की होती है, पर ऐसा नहीं होता। इस साल भारी बरसात के कारण स्टेशन के उत्तर की तरफ बने नये पार्किंग में पानी भर जाने की वजह से गाडीयां डूब गई जिसके कारण उन गाडियों की सर्विसिंग करानी पडी जिसका पूरा खर्चा गाडियों के मालीकों को भुगतान करना पड़ा। जबकि इसकी पूरी जिम्मेदारी पार्किंग संचालक की बनती है। इतना ही नही दो पहिया गाडियों के साथ हेलमेट होता है, पर पार्किंग संचालक हेलमेट की जिम्मेदारी नहीं लेते। जबकि आरटीआई मे मिली जानकारी के अनुसार हेलमेट के लिए ₹2 प्रति 24 घंटे का शुल्क तय किया गया है। अब शहर वासियों की मांग उठने लगी है कि वापस लौटने पर पार्किंग में गाडियां सुरक्षित और साफ सुथरी अवस्था में मिले।





