एमसीएल में व्यापक अनियमितता से परेशान चालक
हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक)
सुंदरगढ़: ओडिशा में कोयला उत्पादन की अग्रणी कंपनी महानदी कोल फील्ड लिमिटेड (एमसीएल) के कुलदा कोयला खान में अनियमितता बरती जा रही है।जिसके कारण कोयला ढुलाई करने वाले ट्रक चालको को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस अनियमितता की वजह भ्रष्ट आचरण को दूर तक ले जाने वाले अधिकारियों का लंबा प्रवास बताया जा रहा है।
सुंदरगढ़ स्थित महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के कुलदा कोयला खान लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का केंद्र बना हुआ है। इसको लेकर समय-समय पर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस मामले पर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई। इस बढ़ती अवैध प्रथाओं के पीछे एक कारण एमसीएल के शीर्ष स्तर के अधिकारियों का लंबा प्रवास बताया जा रहा है। इनमें से कुछ यहां कई सालों से तैनात हैं।
बीते दिनों कोयला परिवहन करने वाले वाहन (ट्रक, टीपर) चालकों और तौल पुल (कांटा) संचालकों के बीच आमना-सामना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे अधिकारी भ्रष्टाचार को जमीनी स्तर तक बढ़ावा देते हैं।

सड़क और परिवहन मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा जारी पत्र संख्या: एस.ओ. 3467 (ई), दिनांक: 16 जुलाई 2018। इसे खान और भूविज्ञान निदेशालय, इस्पात और खान विभाग, ओडिशा सरकार, भुवनेश्वर द्वारा पत्र संख्या: MXXXII-ए द्वारा खान, राउरकेला सर्कल, राउरकेला के उप निदेशक को भी अधिसूचित किया गया है। -39/2022-480/डीओएमजी, दिनांक: 29.10.2022।में यह स्पष्ट रूप से खनिज परिवहन वाहन की वहन क्षमता में 5 प्रतिशत की वृद्धि की अनुमति देता है, जो मल्टी-एक्सल वाहनों में लगभग 2 मीट्रिक टन आता है।
लेकिन, तौल पुल संचालक इस आदेश की परवाह नहीं करते हैं
और जिन वाहनो में कोयले का भार पिछले मानदंडों के अनुसार थोड़ा भी अधिक होता है।उन वाहनों को पास कराने के लिए वे खुलेआम रिश्वत की मांग करते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सैकड़ों कोयला ले जाने वाले वाहनों को तौल पुल से गुजरने के लिए इस रसीद रहित लेवी का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है।
लेवी से एक बड़ी राशि जमा होती है, जिसे एमसीएल के सभी अधिकारियों के बीच साझा किया जाता है। यही कारण है कि एमसीएल के अधिकारियों ने अपने तौल पुल पर इस प्रथा के आरोपों पर अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।
सभी वाहन मालिक इस रिश्वत को देने को राजी नहीं होते, इसलिए वाहन चालकों को तौल पुल पर इनके गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। कभी-कभी कुछ चालक इस गैरकानूनी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाते हैं और रिश्वत देने से मना कर देते हैं। ऐसे चालको के साथ तौल पुल (कांटा) के कर्मचारी बुरा बर्ताव करते हैं और उन पर हमला भी कर देते हैं। ऐसा पिछले महीनों में कई बार हो चुका है। हाल ही में हुए कुलदा खुला कोयला खान में तौल पुल (वेट ब्रिज) कर्मचारियों और चालकों के बीच विवाद इसका एक उदाहरण है। चालकों का आरोप है कि रिश्वत देने से इंकार करने पर तौल पुल के कर्मचारीयो ने उनमें से एक की पिटाई कर दी। इस बर्बरता के खिलाफ जब वाहन चालक एकजुट हुए और विरोध में तुला (कांटा) चौकी का घेराव किया तो तुला चौकी के कर्मचारी वहां से फरार हो गए। बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि चालकों ने उन पर हमला किया और इसके विरोध में उन्होंने तौल पुल (कांटा) को बंद कर दिया। इससे कोयले का परिवहन ठप हो गया । एमसीएल के अधिकारियों ने इस पूरे मामले में अपनी आंखें बंद कर रखी थी, जिसे वे ब्रिज संचालक की अवैध प्रथा के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है।





