महतो समाज के वार्षिक बैठक में लिए गए अहम निर्णय

महतो समाज के वार्षिक बैठक में लिए गए अहम निर्णय

हरहर शम्भू कुमार चौधरी (मुख्य संपादक) 

नुआगाँव प्रखंड अंतर्गत आनेवाले टांगरपाली ग्राम में नागरा सिंहभूम कुर्मी महतो समाज का बंधू मिलन सह वार्षिक उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में ओडिशा और पड़ोसी राज्य झारखंड के महतो जाती के हजारो लोग उपस्थित होकर महतो जाती के उत्थान और समाजिक तथा सांस्कृतिक विकास पर चर्चा की गई। 
चर्चा को आगे बढाते हुए बिजय माहतो ने उपस्थित सदस्यों के  बीच अपने अनुभव और समाज के हित में लिए गए निर्णय को साझा करते हुए कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब हम सब मिलकर इसे हृदय से अपनाएंगे और इसकी उत्थान के लिए मिलकर काम करेंगे। 

चक्रधर माहतो ने चर्चा को आगे बढाते हुए कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि जो लोग अपने जाती,सामाज,सास्कृतिक विकास के लिए महतो जाती के लोगों को एक मंच पर लाया इस समाजिक संगठन के निर्माण में अपना समय और अर्थ लगाया आज उन लोगों पर विभिन्न आरोप लगाकर उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रहे है ऐसे लोग सामाजिक विकास की राह में रोडा़ बनने का काम कर रहे है। 

उन्होने गाँव से जाकर शहर में रहने वाले उन लोगों पर टिप्पणी करते हुए कहा जो गाँव से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया और गाँव वापस आना नही चाहते है-कि गाँव हमारी पहचान, हमारी जन्मभूमि है उन्हे यह समझने की जरूरत है कि गाँव से नाता तोड़कर वे अपनी पहचान खो रहे है यह उनकी मूर्खता है। 

गंवटिया महतो ने कहा कि समाज एक त्रिभुज जैसा है और लोग इस त्रिभुज के कोण है।और त्रिभुज में कोण सबसे बडा़ होता है इसलिए जब भी सामाजिक बैठक रखा जाता है सभी की उपस्थिति अनिवार्य होना चाहिए।ऐसा ना सोचे की केवल पदाधिकारीयो का ही बैठक में होना काफी है। क्योंकि पदाधिकारी आपके लिए है उन्हे आपके मार्गदर्शन और साथ की जरुरत है तभी वे किसी निर्णय तक पहुंच पाएंगे। 

नंदकिशोर महतो ने छोटी उम्र में विवाह और रात में की जाने वाली शादी समारोह के चलन को बदलने की पैरवी की क्योंकि शादीयो में शराब पीने का चलन बढ़ता जा रहा है जिसके कारण कई बार ऐसा देखा जाता है कि शराबियो की वजह से व्यवधान उत्पन्न होने लगते है और व्याह जैसी पवित्र कार्यक्रम में उत्साह की जगह निराशा छा जाती है।

मदन महतो ने भाषा की उन्नति पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए और हमें सभी जगह अपनी भाषा में ही बात करनी चाहिए,हम दूसरो की भाषा को अहमियत देंगे तो एक दिन ऐसा आएगा जब हमारी भाषा विलुप्त हो जाएगी।
उन्होने आगे शिक्षा की अहमियत का वर्णन करते हुए कहा कि हमारे बीच पैसे,जमीन,धन,धान्य की कमी नही है लेकिन हमारे बीच सिविल सेवा, चिकित्सा क्षेत्र, राजनैतिक क्षेत्र,सार्वजनिक क्षेत्र में रूचि रखने वालो की कमी है जो हमारी कमजोरी है।
हम अपना रुतबा दिखाने के लिए  लाखो रूपये खर्च कर देते है इस रूपये को हमे हमारे बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए करना ऊचित होगा। 
यदि हम अपने बच्चों के लिए स्वस्थ वातावरण ,स्वच्छ समाज का निर्माण न करे तो आनेवाली पिढियो की बर्बादी का जिम्मेदार हम स्वयं होंगे।

गिरजा महतो ने कहा कि अभिभावको को चाहिए कि बच्चों को इतना प्यार ना दे की वह बिगड़ जाए, उनकी हर मांग को पूरा करने से पहले उनके हित अहित का ध्यान जरूर रखे। 

महतो समाज के चौथे वार्षिक उत्सव के अवसर पर मंच संचालन रूप देव माहतो ने किया।अतिथि परिचय सुदर्शन माहतो ने दिया। इस कार्यक्रम के अतिथियो में मदन महतो, बिजय महतो, कृष्णा महतो,चक्रधर महतो, कोटिया महतो,नंदकिशोर महतो ,हेमनारायण महतो,कलेशर महतो,राजाराम महतो,बलभद्र महतो,मोनू महतो,रमेश्वर महतो व अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।