परिसीमन बिल पर नवीन पटनायक की तुरंत विशेष सत्र बुलाने की मांग
सतीश शर्मा (उप संपादक)
बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक ने प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से 48 घंटे के भीतर ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में कहा कि इस बिल से ओडिशा की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है, जो राज्य के हितों के खिलाफ है।
नवीन पटनायक ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक का समर्थन तभी करेगी, जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
क्या है चिंता का कारण?
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर लगभग 850 किए जाने की संभावना है। इस बदलाव के बाद ओडिशा की सीटों की संख्या 21 से बढ़कर करीब 29 हो सकती है। हालांकि, सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद कुल हिस्सेदारी में गिरावट की आशंका है। वर्तमान में ओडिशा का लोकसभा में लगभग 3.9 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है, जो घटकर लगभग 3.4 प्रतिशत रह सकता है। इसका मतलब यह होगा कि राज्य की राष्ट्रीय राजनीति में
प्रभावशीलता कम हो सकती है। उनके अनुसार, इससे राज्य की राजनीतिक आवाज लगभग 15% तक कमजोर हो सकती है, जो चिंताजनक है।
नवीन पटनायक की मांग
परिसीमन बिल पर नवीन पटनायक की तुरंत विशेष सत्र बुलाने की मांग
नवीन पटनायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन तभी करेगी, जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों में “0.001 प्रतिशत” भी कमी न हो। राज्य की राजनीतिक आवाज और प्रतिनिधित्व को किसी भी तरह कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
सरकार से क्या मांग?
पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी से आग्रह किया है कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाए।
उन्होंने अपील की कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यह प्रस्ताव पारित किया जाए कि ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों में कोई कमी स्वीकार नहीं की जाएगी।पटनायक ने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां इसे माफ नहीं करेंगी।
पटनायक ने जनता और बीजद कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर राज्य के हितों की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा ओडिशा के भविष्य से जुड़ा है और पार्टी पूरी मजबूती से जनता के साथ खड़ी रहेगी। पत्र में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण का भी जिक्र किया और बताया कि ओडिशा पहले ही पंचायती राज संस्थाओं में 50% आरक्षण लागू कर चुका है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की जरूरत बताई।





