तालचेर में प्रशासन की सह पर फलफूल रहा है नशे का कारोबार

तालचेर में प्रशासन की सह पर फलफूल रहा है नशे का कारोबार

अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ) 

इन दिनों तालचेर में नशीली द्रव्यो की बाढ़ सी आ गई। 
तालचेर में नगरपालिका चुनाव के मद्देनजर, तालचर मुख्यालय में मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री जोरो पर है। प्रशासन भी इस पर नकेल कस नहीं पाया है।  नतीजतन, शराबियों की संख्या में वृद्धि के साथ, कानून व्यवस्था के उल्लंघन के जोखिम से इंकार नहीं किया जा सकता है।  

तालचेर में एक औद्योगिक शहर है, जिससे यहाँ के लोगो के पास धन का अभाव नही है। नतीजन तालचेर थाना के नाक के नीचे यहां शराब माफिया चल रहा है।  तालचेर शहर में चार विदेशी शराब की दुकानें हैं।  
इनमें से कुछ दुकानदार सभी नियमों का उल्लंघन कर विभिन्न वाहनों की मदद से तस्करी कर शहर के बीच ढाबे, शराब बेचने वाली दुकानों और अनगिनत कुटिया में छोटी-छोटी खेप में शराब की आपूर्ति करते हैं।
   
इस प्रतिद्वंद्विता को देखते हुए, कुछ शराब माफिया मूल ब्रांड के लेवल लगाकर तालचेर और उसके आसपास नकली शराब की तस्करी करते हैं।   
इसी तरह तालचेर क्षेत्र से सटे परजंग थाना क्षेत्र के कुछ जाने-माने इलाकों में महुआ शराब निर्माण के लिए एक तरह से कुटीर उद्योग स्थापित किए हुए हैं।
संबंधित माफिया तालचेर शहर से सटे ब्राह्मणी नदी जल मार्ग और संथापाड़ा ब्रिज बहल के चौराहे  से होते हुए तालचेर शहर और उसके आसपास के शहरो में रोजाना हजारों लीटर माहुआ शराब की आपूर्ति कर रहे हैं।  इसी तरह तालचेर शहर में तीन भांग बिक्रय केंद्र हैं।  
ये साहूकार तालचेर शहर के विभिन्न हिस्सों में कुछ बेरोजगार लोगों को इसकी आपूर्ति करते हैं,और ये लोग अपने इलाको में इसकी बिक्री करने का काम करते है। 
अब यह घातक सफेद जहर पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए बर्बादी का एक बड़ा कारण बन गया है।  
इतना ही नहीं, तालचर शहर के कुछ जाने-माने दवा भंडारों में प्रतिबंधित कफ सीरप, नाइट्रोजन की गोलियां दिन के उजाले में बेची जा रही है।
 यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न तो पुलिस और न ही औषधि विभाग इनपर कारवाई कर रही है। 
इन बातों से यह जाहिर होता है कि तालचर में प्रशासन की सहपर   नशे का कारोबार फलफुल रहा है।