जब जीवन मरुस्थल हो तो साहित्य उसे सीचता है
अध्यक्ष भाबेश चंद्र साहू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जीवन मरुस्थल है तो साहित्य जीवन को जीवंत और मधुर बनाता है। यह वाक्य वक्ता द्वारा स्वस्ति साहित्य संसद एवं गोपबंधु पुस्तकालय के तत्वावधान में आयोजित मासिक साहित्य गोष्ठी में अध्यक्ष श्री साहू ने 'सरजन के लक्ष्य, उद्देश्य एवं संभावना' विषय पर चर्चा करते हुए कहा।
उन्होंने आगे कहा कि सत्य और सौंदर्य के तत्व महान साहित्य का निर्माण करते हैं। वर्तमान साहित्य सच्चाई के करीब नहीं आता है। श्रीसाहु का मत था कि जिस साहित्य में अनुभव की तीव्रता का अभाव होता है, उसे हृदय से नहीं समझा जा सकता। संसद के उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष महेंद्र कुमार पटनायक राजकुमार मोहंती की अध्यक्षता एवं समन्वय में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष संजीव कुमार भोई ने कथावाचन किया। संयुक्त संपादक सुशांत कुमार नायक के समन्वय में आयोजित कविता पाठ कार्यक्रम में सर्बा श्री कुंजबिहारी राउत, विजयलक्ष्मी पटनायक, गौतम दास, निरुपमा पति, अशोक कुमार पटनायक, रश्मी साहू ने प्रमुख कविता पाठ किया, जबकि शिक्षक शंकर प्रसाद त्रिपाठी ने समीक्षक के रूप में भाग लिया और व्याख्यान दिया। कहानियों और कविताओं की आलोचनात्मक समीक्षा। अन्य लोगों में श्री करुणाकर पटशानी, प्रताप कुमार रॉय, भज साहू, किशोरी मोहन कर, अजय मोहंती, जगन्नाथ राउत, शंभूनाथ परीडा़, हरिहर शतपती, मानसी महापात्रा, सस्मिता प्रधान, शर्मिष्ठा कवि शतपती और राजीव मणि, डॉ. शक्ति प्रसाद सामंतराय उपस्थित होकर कार्यक्रम के संचालन में अपना अहम योगदान दिया। में योगदान दिया अंत में पुस्तकालय के वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मण नाथ दास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।





