क्रिकेट अंपायरिंग के जय–वीरू की जोड़ी सत्यप्रसाद रथ और छायाकांत त्रिपाठी
सतिश शर्मा (उप संपादक)
जैसे हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ‘जय–वीरू’ के रूप में आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं, उसी तरह राउरकेला के क्रिकेट अंपायरिंग जगत में पिछले दो दशकों से सत्यप्रसाद रथ और छायाकांत त्रिपाठी एक अटूट और भरोसेमंद जोड़ी के रूप में पहचाने जाते हैं।
राउरकेला में जन्मे और यहीं शिक्षा प्राप्त करने वाले ये दोनों अलग-अलग पेशों से जुड़े होने के बावजूद क्रिकेट अंपायरिंग के प्रति समान जुनून, निष्ठा और समर्पण रखते हैं। क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलने के बाद खेल से जुड़े रहने के उद्देश्य से उन्होंने अंपायरिंग को अपना पेशा बनाया और आज वे राज्य स्तर पर एक सम्मानित और विश्वसनीय नाम बन चुके हैं।
सत्यप्रसाद रथ
युवावस्था में राउरकेला की कलाईमैक्स, वाईवाईसी, जेडडीसीसी जैसी विभिन्न क्रिकेट क्लबों तथा संबलपुर विश्वविद्यालय की टीम के लिए ऑलराउंडर के रूप में खेल चुके सत्यप्रसाद रथ ने स्वर्गीय रणजी खिलाड़ी हरमोहन प्रहराज की प्रेरणा से वर्ष 1993 में क्रिकेट अंपायरिंग को अपनी नई पहचान बनाया।
वर्ष 1999 में ओडिशा क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद उन्होंने राज्य क्रिकेट संघ द्वारा संचालित कालाहांडी कप, अंडर-19 एवं अंडर-16 प्रतियोगिताओं, स्कूल एवं सीनियर महिला क्रिकेट प्रतियोगिताओं, कटक क्लब लीग के अलावा देवगढ़, पाटणागढ़, टेन्सा, तालचेर और सोनपुर में आयोजित अखिल भारतीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग की है।
वर्तमान में 58 वर्षीय श्री रथ व्यवसाय के साथ-साथ अंपायरिंग को संतुलित रूप से निभा रहे हैं। प्रथम श्रेणी की रणजी जैसी प्रतियोगिताओं में अवसर न मिल पाने का उन्हें कुछ अफसोस अवश्य है, लेकिन वे अपने कार्य से संतुष्ट हैं।
वे कहते हैं,
“वर्ष में लगभग 60–70 दिन क्रिकेट मैदान में बीत जाते हैं। ईश्वर की कृपा से अब तक किसी भी अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। जब तक शरीर स्वस्थ रहेगा, अंपायरिंग करता रहूंगा।”
छायाकांत त्रिपाठी
राउरकेला इस्पात संयंत्र के एसएमएस-2 विभाग में सहायक प्रबंधक के रूप में कार्यरत छायाकांत त्रिपाठी राउरकेला के क्रिकेट मैदानों में एक जाना-पहचाना नाम हैं। लगभग तीन दशक पहले क्रिकेट के प्रति लगाव ने उन्हें अंपायरिंग की राह पर ला खड़ा किया।
करीब दस वर्षों तक क्लब स्तर पर अंपायरिंग करने के बाद वर्ष 2006 में वे राज्य क्रिकेट संघ की स्वीकृत अंपायर सूची में शामिल हुए। वर्ष 2009 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की लेवल-1 परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए योग्यता हासिल की।
श्री त्रिपाठी ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ ओडिशा प्रीमियर लीग (2009, 2011), ओडिशा क्रिकेट लीग, अंतर-इस्पात संयंत्र क्रिकेट प्रतियोगिता, सेल (SAIL) ट्रॉफी तथा अखिल भारतीय वेटरन क्रिकेट प्रतियोगिताओं में सफलतापूर्वक अंपायरिंग की जिम्मेदारी निभाई है।
वे कहते हैं,
“जिम्मेदारीपूर्ण नौकरी होने के कारण सभी टूर्नामेंटों में अंपायरिंग करना संभव नहीं हो पाता। लेकिन सीमित अवकाश में जितना संभव होता है, उतना करता हूं। खेल और मैदान में समय बिताने का आनंद मुझे बार-बार वापस खींच लाता है।”





