क्या योग का कोई दिवस हो सकता है - नितिन सिन्हा
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)
योग का कोई दिवस नही हो सकता क्योंकि योग तो दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।।
बाकी साधन-संपन्न और अपने लिए जीने वाले लोग किसी भी दिन को कोई भी नाम देकर कैसा भी उत्सव मना सकते है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नही पड़ता।। जैसे 15 अक्टूबर को विश्व हाथ धुलाई दिवस घोषित किया गया। जबकि हाथ धोना हमारे दैनिक जीवन में शामिल है और यह रोजमर्रा की बातें है।
मुझे लगता है कि करोड़ो-अरबो रुपये खर्च कर योग दिवस के प्रचार-प्रसार से बेहतर होता,कि करीब 20,करोड़,भूखे,बदहाल,बीमार,गरीब,निरीह बच्चों के लिए आज के दिन कुछ सार्थक कर लेते।। वैसे भी दैनिक जरूरतों के लिए कड़ा संघर्ष करने वाले हमारे देश में हर उत्शव तब तक बेमानी है जब तक अपने 20 करोड़ जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हम आप कुछ बेहतर नही कर लेते...।
वैसे भी जो चीज़ें दैनिक की जाती हों, उसके उत्सव का ढोंग क्यों करना.? ऐसे तो योग दिवस के तर्ज पर आने वाले दिनों में गम्भीर मुद्दों से घिरी असफल सरकारें *आपसे विश्व अन्न-जल ग्रहण,विश्व कार्यालय गमन,घर आगमन,संध्या-स्वल्पाहार,रात्रि भोज,शयन-उठन और विश्व शौच-स्नान आदि दिवस भी मनवाने वालीं हैं।*
पर इससे क्या हासिल होना है? ऐसी दिवसो का पालन कर देश की समस्याओं में कोई सुधार नही आ सकता।
उदाहरण स्वरूप "वेलेन्टाइन डे" का प्रचलन,विश्व हाथ धुलाई दिवस, योग दिवस प्रथम दृष्टा में केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए एक उत्सव या सामूहिक मेलजोल का दिवस और राजनैतिक पार्टीयो के लिए मीडिया में बने रहने का एक माध्यम नजर आता है। इन दिवसो का आम आदमी पर ना तो कोई प्रभाव पड़ता नजर आता है और ना ही इससे उन्हें कोई लाभ मिलता नजर आता है।
फिर भी आपको आपके विश्व योग दिवस 21 जून की ढेरों बधाइयां.....





