कुड़मी काला दिवस पर पाँच सूत्रित मांग पत्र शौपा गया
नगरा पीढ़ी कुडुमी समाज, डरईकेला, बिश्रा की ओर से कुडुमी कला दिवस के अवसर पर 5 सूत्रीय दावा पत्र खंड़ विकास अधिकारी जगन्नाथ हनुमान (ओडिशा प्रशासनिक सेवा) के माध्यम से मुख्यमंत्री, ओडिशा, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को दिया गया।
क्या है वह मांगे-
1- कुडुमी को अनुसूचित जनजाति अनुसूची में पुनः शामिल करना,
2- कुड़माली भाषा को संविधान के 8वें पैराग्राफ में शामिल करना आदि , हालाँकि, सरकार के 1908, 1913, 1931 के राजपत्र विभाग के दस्तावेजों में। कुडुमी का उल्लेख एक जनजाति के रूप में किया गया है।
कुड़मी पहले भी एक जनजाति थी, अब भी है और भविष्य में भी एक जनजाति रहेगी। कुड़मी जनजाति राजनीतिक साजिश का शिकार है।
6-सितंबर 1950 में 13 आदिवासी जनजातियों में से कुडुमी जनजाति को छोड़कर अनुसूचित जनजाति अनुसूची बिना किसी अधिसूचना के तैयार की गई थी। तत्कालीन सांसद हाहालीनाथ कुजुरू ने संसद में सवाल उठाया और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि यह आधिकारिक गलती है, इसे सुधार लिया जाएगा। पर इसे किसी कारण से बाहर रखा गया,इसका सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।
लेकिन दुर्भाग्य से, आज 74 साल हो जाएंगे जब कुडुमी जनजाति अपने संवैधानिक अनुसूचित जनजाति अधिकारों से वंचित है। कुड़मी जनजाति के साथ हो रहे अनुचित व्यवहार के खिलाफ बुद्धिजीवी विधायक, सांसद, झारखंड, विधानसभा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, संसद में कई बार मांग कर चुके हैं। देहात से लेकर दिल्ली तक कुडमी काला दिवस से अनुशासित तरीके से ट्रेन रोको आंदोलन करते आए है।
कुड़मी कला दिवस के अवसर पर टुसू भवन में नगरा पीढ़ी कुडुमी समाज के अध्यक्ष ध्रुव चरण महतो की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में समाज में व्याप्त खराब शिक्षा संस्कृति की राजनीतिक चेतना की कमी के कारण उत्पन्न विभिन्न समस्याओं एवं उनके निदान पर चर्चा की गई। इस मौके पर संपादक सीताराम महतो, सदस्य महेंद्र महतो, शिवचरण महतो फुलीधर महतो, आकाश महतो, कालुचरण महतो, पुष्पा महतो, ललिता महतो, मालती सुमन पूजा महतो उपस्थित थे।





