उडुपी के सामने मुख्य सड़क बनी अघोषित पार्किंग

उडुपी के सामने मुख्य सड़क बनी अघोषित पार्किंग

अयोध्या में 'उडुपी रेस्टोरेंट' के बाहर पार्किंग का संकट: नियमों की अनदेखी पर उठे बड़े सवाल

अनिल कुमार वर्मा (व्योरोचीफ) 

रामनगरी अयोध्या में इन दिनों एक बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान और उसकी पार्किंग व्यवस्था शहरवासियों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। 'उडुपी' (उडुपी टू मुंबई) जैसे बड़े नाम वाले इस प्रतिष्ठान के सामने सड़क पर खड़ी होने वाली गाड़ियों की लंबी कतारें प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। उडुपी केवल रेस्टोरेंट ही संचालित नहीं करता साथ ही यात्रीयों के ठहरने के लिए कमरे (लाॅज) भी संचालित करता है। यह प्रतिष्ठान रामलला मंदिर के ठीक सामने होने और पास में ही श्रीराम अस्पताल तथा रेलवे स्टेशन होने से अयोध्या‌ धाम - अयोध्या कैंट (फैजाबाद) मुख्य मार्ग पर स्थित यहाँ हमेशा दर्शनार्थियों, राहगीरों एवं यात्रीयों की अत्यधिक भीड़ रहती है। 

 मुख्य बिंदु और जनमानस के सवाल 

पार्किंग का अभाव: उडुपी टू मुंबई रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहकों और यहाँ रुकने वाले मेहमानों के लिए परिसर के भीतर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

सड़क पर कब्जा: प्रतिष्ठान के बाहर मुख्य सड़क पर ही वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे राहगीरों और अन्य वाहन चालकों, यात्रीयों एवं दर्शनार्थियों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नक्शे की वैधता पर संशय: स्थानीय लोगों और सवाल उठाने वालों का मुख्य प्रश्न यह है कि बिना पर्याप्त पार्किंग के इस भवन का मानचित्र (नक्शा) अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा कैसे स्वीकृत किया गया?

कार्रवाई में दोहरा मापदंड: जहां एक ओर छोटे दुकानदारों या ठेलों के सड़क पर आने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है, वहीं बड़े प्रतिष्ठानों के बाहर सड़क को पार्किंग स्थल बनते देख भी जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं।

जिम्मेदार विभागों से तीखे सवाल

इस पूरे मामले को लेकर अब सीधे तौर पर अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) नगर निगम और यातायात विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में है:

यदि मौके पर पार्किंग की जगह नहीं है, तो मानचित्र में इसे कैसे दिखाया गया और नक्शा पास कैसे हुआ?

यदि बिना नक्शा पास किए या नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां (रेस्टोरेंट और कमरे) संचालित हो रही हैं, तो अब तक सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर आम जनता को यूं ही सड़क पर लगने वाले जाम से प्रतिदिन जूझना पड़ेगा?

यह मामला सिर्फ एक 'उडुपी' रेस्टोरेंट का नहीं, बल्कि शहर में हो रहे अनियोजित व्यावसायिक निर्माण और नियमों की निगरानी करने वाले विभागों की साख का है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन नींद से जागेगा और निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर अयोध्या की सड़कों को ही अघोषित पार्किंग स्थल मान लिया जाएगा?