आखिर कबतक ठगे जाएंगे विस्थापित
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में विस्थापितों का मुद्दा थमने का नाम नही ले रही है,जिले में जहाँ भी विकास मूलक कार्य के लिए लोग विस्थापित हुए है वहाँ के विस्थापितो को आज तक उनका हक नही मिला। नतिजा यह हुआ कि विस्थापित अपने हक के लिए कभी धरनाप्रदर्शन तो कभी प्रशासनिक अधिकारीयो के कार्यालय के चक्कर पे चक्कर लगाने को मजबूर है, कई मामले तो ऐसे भी देखने को मिली कि प्रशासनिक स्तर पर कागजों में विस्थापितो के मुद्दो पर कार्यवाही की गई है पर यह कार्यवाही कागजो पर ही सीमट कर रह गई जिससे समय समय पर विस्थापितो के शब्द का बांध टूटता नजर आया और प्रशासन के प्रति इनकी नाराजगी हड़ताले रैलियो धरनाप्रदर्शन के माध्यम से सार्वजनिक तौर पर नजर आया।
ऐसा ही एक मामला पिछले दो दिनों से राउरकेला के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) कार्यालय के द्वार पर देखने को मिल रहा है।
एडीएम कार्यालय के बाहर 32 गांवों के हजारों विस्थापित धरने पर बैठे है धरना स्थल से मिली जानकारी के अनुसार इन्हें मंदिरा डैम एवं राउरकेला इस्पात संयंत्र के लिए विस्थापित किया गया था। इन लोगो का कहना है कि सरकार ने जिले में विकास कार्य के लिए इनके भूमि का अधिग्रहण किया पर जिन शर्तो पर इनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया था भूमि के बदले इन्हें जो सुविधाएं और रियायते मिलनी थी वह नही मिली।
पिछली दिनो जिला प्रशासन की ओर से विस्थापित बेरोजगारो को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था कागजी खानापुर्ति भी पूरी हो चुकी है पर अबतक उपयुक्त उम्मीदवारो को नौकरी नही दी गई । जिला प्रशासन के इस ढुलमुल रवैया से निराश विस्थापितो ने राउरकेला में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कार्यालय के द्वार पर ही धरना दे दिया। पहले तो धरनाप्रदर्शन का दिन तय था पर अब प्रदर्शन कारीयो का कहना है कि जबतक मांगे पूरी नहीं होती धरनाप्रदर्शन जारी रहेगा। इस कड़ाके की ठंड़ में हजारों प्रदर्शनकारी जिनमें महिलाएं, गर्भवती महिलाएं, बच्चे, ओर बुजुर्ग भी शामिल है खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे है।
महिलाओं को नहाने धोने, नित्यकर्म के लिए असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है, बच्चों को ठंड़ लगने, बिमार होने का भी भय है पर प्रदर्शनकारी अपने जिद पर अडे़ है,मांगे पूरी ना होने तक पीछे हटने को तैयार नही है। ऐसा लगता है विस्थापितों ने इसबार आरपार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है।
अब देखना यह है कि परिणाम क्या निकलता है जिला प्रशासन अपने वादे के मुताबिक कार्यवाही करती है या फिर विस्थापितो को एक और फाइल का भार थमा देती है।





