हॉकी खिलाड़ी गढ़ती एक महिला कोच रेशमा लाक्रा

हॉकी खिलाड़ी गढ़ती एक महिला कोच रेशमा लाक्रा

सतिश शर्मा (उप संपादक) 

सुंदरगढ़ जिले ने भारतीय हॉकी को अनेक प्रतिभाएं दी हैं। इसी मिट्टी से निकलीं रेश्मा लकड़ा आज महिला हॉकी की नई पीढ़ी को तराशने में जुटी हैं। कभी पानपोष क्रीड़ा छात्रावास में एक खिलाड़ी के रूप में अभ्यास करने वाली रेश्मा आज उसी छात्रावास में सबजूनियर महिला हॉकी टीम की सहायक कोच के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय अंडर-14 अस्मिता प्रतियोगिता में उनकी कोचिंग में ओड़िशा महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। इससे पहले रांची में आयोजित सबजूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में भी ओड़िशा ने कांस्य पदक हासिल किया। यह उपलब्धि रेश्मा के सतत प्रयासों और खिलाड़ियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।राजगांगपुर प्रखंड के लांजीबर्ना गांव में जन्मी रेश्मा लकड़ा का हॉकी के प्रति लगाव ने उन्हें वर्ष 2005 में पानपोष क्रीड़ा छात्रावास तक पहुंचाया। वर्ष 2012 तक उन्होंने वहीं रहकर प्रशिक्षण लिया। 

वर्ष 2017 में उन्होंने एनआईएस बेंगलुरु से कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया । इसके बाद उनके पेशेवर कोचिंग करियर की शुरुआत बरसुआँ स्थित ध्यानचंद मेमोरियल ट्रस्ट से हुई, जहां उन्होंने 2017 से 2020 तक कार्य किया। बाद में वे भुवनेश्वर स्थित अभिनव बिंद्रा टारगेट परफॉर्मेंस सेंटर से भी जुड़ीं। वर्ष 2024 से वे पानपोष क्रीड़ा छात्रावास में सबजूनियर महिला हॉकी टीम की सहायक कोच के रूप में कार्यरत हैं। रेश्मा का मानना है कि ओड़िशा में खेल सुविधाओं में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार हुआ है। क्रीड़ा छात्रावासों में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहायता देने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद वे मानती हैं कि परिणाम अभी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आ पा रहे हैं। उनके अनुसार खिलाड़ियों में प्रतिभा और कौशल की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिनिशिंग में सुधार की जरूरत है।

 वे स्पष्ट शब्दों में कहती हैं कि “हमारे खिलाड़ी मेहनती हैं, लेकिन आधुनिक हॉकी में केवल मेहनत नहीं, खेल को समझने और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है।”
रेश्मा यह भी स्वीकार करती हैं कि अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। ऐसे में ओड़िशा के खिलाड़ियों को तकनीकी और मानसिक रूप से और मजबूत बनना होगा। मिडफील्डर के स्थान पर खेलने वाली रेश्मा के मन में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाने की टीस तो है लेकिन उन्होंने इस निराशा को कमजोरी नहीं बनने दिया। अब वे चाहती हैं कि उनकी शिष्याएं वह मुकाम हासिल करें, जो कभी उनका सपना था।वर्ष 2022 में उन्होंने बिपिन मिंज के साथ विवाह किया। पारिवारिक जिम्मेदारियों और खेल जीवन के बीच संतुलन बनाते हुए वे लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। 

रेश्मा कहती हैं कि जिस मैदान ने उन्हें पहचान दी, उसी मैदान पर अब नई प्रतिभाओं को तैयार करना उनके लिए गर्व और खुशी दोनों की बात है।