हम जीना चाहते है हमारी मदद करे

गंभीर बिमारी से ग्रस्त परिवार के कई लोग ,सीमित आय का साधन होने के कारण इलाज कराने में आर्थिक रूप से असमर्थ हो गए है। परिवार के लोगों ने मीडिया के माध्यम से देश वासियों और जन प्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है।

हम जीना चाहते है हमारी मदद करे

अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ) 

कहते है कि भगवान की लीला को कोई समझ नहीं पाया,संसार की यह एक अद्भुत तस्वीर है,कि वह किसी की थाली खीर पुडी से भरता है तो कोई पानी के बिना प्यासे ही मर जाता है। 
कोई संसार की सारी खुशियों से परिपूर्ण है तो किसी के दुखों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि उसकी दुनिया बिखर जाती है।  ऐसी ही एक दुर्लभ घटना तालचेर ब्लॉक के धरमपुर गांव के एक परिवार के साथ घटी है। परिवार के लोगों ने बताया कि अनिल के पिता, मां, दो बेटे और पत्नी हैं।  वह जीविकोपार्जन के लिए एक छोटी सी चाय की दुकान चलाता है। 
एक बहुत छोटी आमदनी से गुजर बसर करने वाला अनिल के बेटे का दो साल की उम्र में दिल का ऑपरेशन हुआ है,जिसमें उनके लाखों खर्च हो गए हैं। जबकि अनिल के पिता किडनी रोग से ग्रसित है और किसी तरह अपनी बीमारी का इलाज करा रहे हैं। ऐसे समय में उनके सर पर एक और समस्या आन पडी़। अपनी पत्नी के सर की समस्या का जाँच कराने पर पता चला कि उसे ब्रेन ट्यूमर है, जिसे कैंसर कहा जाता है। अब उन्होंने कर्ज लेकर और हेल्थ कार्ड का इस्तेमाल करके सर्जरी करवाई है, लेकिन डॉक्टर के मुताबिक, अगर उन्हें 4 साल तक इलाज नहीं मिला तो उन्हें दिक्कत हो सकती है। आखिर एक छोटी सी चाय की दुकान से वह कितना कमाएगा और कैसे अपना घर का खर्च चलाएगा या अपनी पत्नी, बेटे और पिता का इलाज कराएगा। 
उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के सामने कहा कि, इस संदर्भ में अगर जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और सरकार मदद के लिए हाथ बढ़ाती तो अनिल की पीड़ा कुछ हद तक कम हो सकती थी और उनकी पत्नी और बच्चों के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान फिर से वापस हो सकती है। अनिल के परिवार की मदद के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक तालचेर शाखा, खाता संख्या-152201000004198, आईएफसी कोड-आईओबीए 0001522 और फोन नंबर-833797 1794 से मदद की गुहार लगाई है।