स्कूल ड्रॉपआउट रोकने के लिए अनुपस्थित छात्रों के घर जाएंगे ओडिशा के शिक्षक

स्कूल ड्रॉपआउट रोकने के लिए अनुपस्थित छात्रों के घर जाएंगे ओडिशा के शिक्षक

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा करने और स्कूल छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि जो छात्र एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं, उनके घर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाए।

इस पहल के तहत प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए एक नया परामर्श जारी किया है। यह निर्देश ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (OSCPCR) के दिशा-निर्देशों के बाद जारी किया गया है।
परामर्श में चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक स्कूल से अनुपस्थिति बच्चों के ड्रॉपआउट, बाल श्रम और कम उम्र में विवाह जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है। इसे रोकने के लिए स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि शिक्षक, प्रधानाध्यापक अथवा स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्य स्वयं छात्रों के घर जाकर उनकी अनुपस्थिति के कारणों का पता लगाएं और समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं।
OSCPCR के अनुसार, ऐसे गृह भ्रमण से बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने, बाल शोषण को रोकने और उनके समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह पहल निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के अनुरूप है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की भूमिका बच्चों की उपस्थिति पर निगरानी रखने और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को इस परामर्श को तत्काल प्रभाव से लागू करने तथा अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षा प्रणाली में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।