सुंदरगढ़ जिले वालीबॉल हॉस्टल आवश्यक
सतीश शर्मा (उपसंपादक)
सुंदरगढ़ जिले वालीबॉल हॉस्टल आवश्यक-अन्ना केरकेट्टा;"वालीबॉल कोच और रेफरी"
सुंदरगढ़ जिले के आदिवासी समुदाय के खिलाड़ी अब अपने परंपरागत खेलों- हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स के दायरे से बाहर निकल कर अन्य खेलों में भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रहे हैं। न केवल खिलाड़ी बल्कि इसके साथ वे अन्य युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शक (कोच, रेफरी) भी बन रहे हैं। इसका एक ज्वलंत उदाहरण है राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वालीबॉल खिलाड़ी अन्ना केरकेट्टा। सक्रिय खिलाड़ी जीवन से दूर होने के बाद वे अब प्रशिक्षक और राष्ट्रीय स्तर की रेफरी बनकर वालीबॉल की सेवा
कर रही हैं।
राउरकेला जगदा के सेंट मेरी विद्यालय में खेलशिक्षक के रूप में कार्यरत अन्ना केरकेट्टा स्कूल समय के बाद शाम को सेक्टर 20 स्थित राइजिंग क्लब में दो घंटे लड़कियों को वालीबॉल के गुर सिखाती हैं।
केसरामल (राजगांगपुर प्रखंड) गांव में जन्मी अन्ना का परिचय वालीबॉल से राजगांगपुर सेंट मेरी स्कूल में पढ़ते समय हुआ। 1990 में जब क्रीड़ा छात्रावास के लिए चयन हो रहा था, तब उनका चयन हॉकी और वालीबॉल—दोनों के लिए हुआ। पर भुबनेश्वर जाने की इच्छा ने उसने हॉकी की जगह वालीबॉल चुना। ऊंचा कद और मजबूत शरीर की वजह से एक वर्ष के अंदर ही एक अटैकर खिलाड़ी के रूप में उसने अपनी पहचान बना ली।
1991 से 1996 तक अन्ना ने सब-जूनियर, जूनियर, सीनियर, ग्रामीण, स्कूल और महिला राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ओडिशा का प्रतिनिधित्व किया।
1997 में विवाह के बाद राउरकेला आने के बाद जीवन की प्राथमिकताएँ बदल गईं और वे खेल से पूरी तरह दूर हो गईं। लेकिन खेल का रिश्ता टूटता नहीं—बस ठहर जाता है।
लगभग एक दशक बाद 2010 के आसपास उन्होंने फिर से मैदान की ओर कदम बढ़ाए और आरएसपी दल के साथ दो-तीन वर्षों तक पुनः खेलीं। 2014 में खेल प्रेमी कुना जेना ने उन्हें दोबारा वालीबॉल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने में कोच की नई भूमिका संभाली। आगे चलकर शिशिर साहू ने उन्हें सेक्टर-20 के राइजिंग क्लब में लड़कियों को प्रशिक्षण देने का अवसर दिया जंहा वे राउरकेला की बेटियों के सपनों को आकार दे रही हैं। कोचिंग के साथ अन्ना ने 2014 में राज्य रेफरी की परीक्षा उत्तीर्ण की और 2015 में ल राष्ट्रीय रेफरी बनीं। अब वे ओडिशा में रेफरी की भी भूमिका भी निभाती हैं।
एक अटैकर से मार्गदर्शक बनकर आज अगली पीढ़ी को वालीबॉल सिखा रही अन्ना कहती हैं कि अभ्यास के लिए शुरू में काफी लड़कियाँ आती हैं, लेकिन थोड़े समय बाद उनकी संख्या कम हो जाती है। उनके माता पिता को वालीबॉल में आगे बढ़ने की संभावना कम दिखाई देती है।
अन्ना केरकेट्टा का मानना है कि इसका स्थायी समाधान सुंदरगढ़ जिले में वालीबॉल छात्रावास की स्थापना किया जाना है। हॉस्टल का अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण ही जिले के अदिवासी खिलाड़ियों को, विशेष कर लड़कियों, को आगे बढ़ा सकता है। जिले में अदिवादी बच्चों में बहुत प्रतिभा है। वे वालीबॉल में भी हाकी की तरह सफलता हासिल कर सकते है। यहां की बेटियाँ भी हॉकी की तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती हैं।





