सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में पैर पसारता जुआ और शराब

सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में पैर पसारता जुआ और शराब

झारखंड - ओडिशा सीमावर्ती अंचलों में सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सवो के बीच खुलेआम हाब्बा डब्बा, डाईस, ताशपत्ती, सट्टेबाजी जैसे जुआ खेल का आयोजन होना,और शराब जैसे मादक पेय पदार्थो का बिक्रय होना लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। 

इन अंचलो में खेल कुद सह मुर्गा पाड़ा का आयोजन करना स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर है। लेकिन मुर्गा पाड़ा और खेलकूद की आड़ में हाब्बा डब्बा, डाईस,व अन्य तरह के जुआ खेल का आयोजन सांस्कृतिक को कलंकित करने जैसा है। 
गुप्त सूत्रों की माने तो इन अंचलो में स्थानीय पुलिस प्रशासन की मिली भगत से मुर्गा पाड़ा या सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आड़ में हाब्बा डब्बा, डाईस जैसे खेल का आयोजन किया जाता है। 
यह जुआ खेल गाँव के गरीब व भोले भाले लोगों के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो रहा है। 

जुए में लोग अपनी गाढ़ी कमाई फूंक रहे है तो कई लोग ऐसे भी है जो जुआ खेलकर कर्जे में डूब चुके है। घर के समानों को बेच चुके है,और घर में अशांति और झगड़ा का कारण बन बैठे है। 

बात यही तक रूकती है, इन सामाजिक बुराई के विरूद्ध कई लोगों ने आवाज भी उठाई है,पर जिसने भी आवाज उठाई उसकी आवाज दबा दी गई । इन अंचलो में कई गाँव ऐसे भी है जिन्होंने अपने सीमा तक में शराब बंदी कर रखी है पर इन गाँव के शराबी दूसरे गाँव से शराब पीकर आते है। 
शराब और जुआ जैसे सामाजिक बुराई को स्थानीय दबंगो का भी समर्थन प्राप्त होता है, इसका कारण इन लोगों से समय समय पर मिलने वाला आर्थिक सहयोग और शराब,कबाब व की दावत है। 

यही वजह है कि शराब,गाँजा,हिरोईन,जुआ,जैसे सामाजिक बुराईयाँ धीरे धीरे गाँव -गाँव में अपना पैर पसार रही है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो भविष्य में बुराईयाँ चरम सीमा पर होगी जिसका सीधा असर गृहस्थ जीवन पर पड़ेगा। जो अभी से दिखाई देने लगी है।