रेलवे से प्रभावित लोगों ने की मुआवजा की मांग,

रेलवे से प्रभावित लोगों ने की मुआवजा की मांग,

लखन लोहार (संवाददाता) 

बण्डामुण्डा नेपाली बस्ती में लम्बे समय से चले आ रहे भूमि विवाद को लेकर प्रदर्शन कारियो ने अपनी मांगो को सूचि बद्ध कर, 
क्षेत्रीय रेलवे प्रबंधक के माध्यम से मंड़ल रेलवे प्रबंधक को मांग पत्र सौपी। 
यह मांग पत्र माहेश्वर तांति और पूर्व विधायक जार्ज तिर्की की अगुवाई में सैकडो़ स्थानीय लोगों ने बण्डामुण्डा में  क्षेत्रीय रेलवे प्रबंधक को उनके कार्यालय में सौंपी। और क्षेत्रीय रेलवे प्रबंधक से बिचार विमर्श करने के साथ लम्बे समय से चले आ रहे इस भूमी विवाद को जल्द से जल्द निपटारा करने के साथ प्रभावित लोगों के लिए मुवावजा की मांग की गई है। 

मांग पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि - जनवरी - फरवरी 2022 के दौरान, बोंडामुंडा में रेलवे पुलिस बल द्वारा 31 आवासीय घरों पर बुलडोजर चलाया गया था, जो कि खाता नंबर 5 (राखिल) के भीतर 9.55 एकड़ क्षेत्र में थे, जो ओडिशा सरकार के हैं। उक्त भूमि कभी भी रेलवे विभाग के अंतर्गत नहीं आती है। रेलवे क्षेत्र. प्रभावित व्यक्तियों की सूची इसके साथ संलग्न है। इसके अलावा धान की खेती को भी रेलवे विभाग द्वारा नुकसान पहुँचाया गया। इस भूमि पर दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा अवैध रूप से शेड का निर्माण कार्य किया जा रहा है। खेती करने वालों की सूची इसके साथ संलग्न है। अब फिर से उन 35 परिवारों को नोटिस भेजा गया है जो कभी भी रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आते। 

यह कि दिनांक 21.08.2023 को प्रदर्शन स्थल पर तहसीलदार - राउरकेला, डी.एस.पी. - राउरकेला (बोंडामुंडा क्षेत्र) एलएलसी बॉन्डामुंडा, डी.एस.पी., जीआरपी, एलएलसी, जीआरपी, बॉन्डामुंडा, राजस्व निरीक्षक बरकानी उपस्थित थे, और उन्होंने रेलवे अधिकारियों के साथ चर्चा की और उन्हें संबंधित भूमि में प्रवेश न करने की चेतावनी दी और 9.55 एकड़ भूमि के भीतर लाल झंडा लगाया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि खाता नंबर 5 (रखित) प्लॉट नंबर 496 किसम- जीबी-II सरकारी है। ओडिशा सरकार की संपत्ति का एक हिस्सा है। उन्होंने दक्षिण पूर्व.रेलवे का निर्माण कार्य भी रोक दिया।

इससे पहले भी 2017 के दौरान मार्शलिंग यार्ड बंडामुंडा के आदिवासियों और प्रभावित विस्थापितों की ओर से माननीय एनसीएसटी नई दिल्ली के समक्ष याचिका दायर की गई थी और वास्तविकता का पता चलने के बाद एनसीएसटी चेयरपर्सन ने इसे स्वीकार कर लिया था और फ़ाइल संख्या डीओ/5/2017 के माध्यम से इसे पंजीकृत किया था। /STGOR/ DELAAG/RO-III सुनवाई के बाद, उनके कार्यालय ने दो बार यानी 05-07-2018 और 17-12-2019 को सिफारिश की जो इस प्रकार थी।

(ए) सरकार के अनुसार। ओडिशा परिपत्र संख्या एजी/40/2005/49777/सीएसआर एवं डीएम के अनुसार सरकार को प्रत्येक आदिवासी विस्थापित परिवार को न्यूनतम 5 एकड़ भूमि आवंटित करनी चाहिए।

(बी) रेलवे प्राधिकरण को प्राथमिकता के आधार पर आदिवासी विस्थापित और प्रभावित व्यक्ति को रेलवे में नौकरी प्रदान करनी चाहिए।

(सी) किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले एस.ई. रेलवे. और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित विस्थापितों से वार्ता करनी चाहिए।

(डी) जब तक विस्थापित जनजातियों और प्रभावित व्यक्तियों की समस्या का समाधान  नहीं हो जाता, तब तक उन्हें किसी भी राज्य में किसी भी तरह से बेदखल नहीं किया जाना चाहिए।

तदनुसार, 14.02.2022 को एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई जिसमें ए.डी.एम. राउरकेला, एस.पी. राउरकेला और दक्षिण पूर्व रेलवे . के प्रतिनिधि, उपस्थित होकर मामले पर चर्चा की और एनसीएसटी की सिफारिश पर विचार किया।

उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे को एक महीने के भीतर इस मुद्दे को शीघ्र निपटाने के लिए आगे आना चाहिए।

अब देखना यह है कि अपने हक के लिए प्रभावित लोगों को और कब तक संघर्ष करना होगा।