रेत माफियाओं पर भाजपा का हल्लाबोल अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

रेत माफियाओं पर भाजपा का हल्लाबोल अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

सारंगढ़ में रेत माफिया का नंगा नाच...बीजेपी जनप्रतिनिधियों ने बरभाटा घाट पर बोला हल्ला..अधिकारियों की 'रहस्यमयी' चुप्पी पर  उठे सवाल!

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​सारंगढ़: सत्ता और सिस्टम की नाक के नीचे चल रहे अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ अब जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। सारंगढ़ के बरभाटा घाट पर उस वक्त भारी गहमागहमी का माहौल बन गया, जब जिला पंचायत सदस्यों की टीम भारी संख्या में ग्रामीणों के साथ मौके पर जा धमकी। यह महज एक निरीक्षण नहीं, बल्कि प्रशासन और रेत माफिया के नापाक गठबंधन के खिलाफ एक खुला 'हल्ला बोल' था।

​अधिकारियों की मेहरबानी या मिलीभगत?

मौके पर मौजूद जिला पंचायत सदस्य हरिहर जायसवाल और लता लक्ष्में ने अवैध उत्खनन को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की, तो विभाग की संवेदनहीनता खुलकर सामने आ गई। जिम्मेदार अधिकारी फोन पर जनप्रतिनिधियों की बातों को टालमटोल करते नजर आए। 

सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सा 'कुख्यात रेत तस्कर' है, जिस पर जिले के आला अधिकारी इस कदर मेहरबान हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझ रहे?

​शासन को लाखों का चूना, सिस्टम बेपरवाह-

बिना रॉयल्टी के दिन-रात हो रहे रेत उत्खनन से शासन को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूप से चल रही इस मशीनरी ने पर्यावरण और नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं। मौके वारदात पर मौजूद भारी भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।

​क्या भाजपा सरकार में जनप्रतिनिधियों की अहमियत शून्य?-

बरभाटा घाट पर मचे इस घमासान ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारी और ग्रामीण दबी जुबान में पूछ रहे हैं— "क्या भाजपा सरकार में भाजपा के ही जनप्रतिनिधियों का कोई औचित्य नहीं रह गया है?" जब सत्ता पक्ष के सदस्य ही माफिया के आगे खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और संसाधनों की रक्षा कौन करेगा?

​पूछता है सारंगढ़-

​आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है बरभाटा का रेत माफिया?

​अवैध उत्खनन की शिकायतों पर टालमटोल करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

​राजस्व की इस खुली डकैती का असली मास्टरमाइंड कौन है?

​फिलहाल, जनप्रतिनिधियों के इस कड़े रुख के बाद जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या यह 'हल्ला बोल' माफिया की कमर तोड़ेगा या मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।