राज्य प्रशासनिक सेवा के 7 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला
प्रशासनिक फेरबदल के बीच CGPSC के नियंत्रक भी हटाए गए राज्य प्रशासनिक सेवा के 7 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला, लगातार उठ रहे सवालों के बीच आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर नजर
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रशासनिक आधार पर राज्य प्रशासनिक सेवा के 7 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस फेरबदल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के नियंत्रक को भी हटाया गया है। राज्यपाल के नाम से सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव कलेमेन्टीना लकड़ा द्वारा जारी आदेश के तहत सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नवीन पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर हुए इस फेरबदल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब CGPSC की कार्यप्रणाली, परीक्षाओं की पारदर्शिता और संस्था की लगातार गिरती साख को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद, परिणामों को लेकर अभ्यर्थियों की आपत्तियां और विभिन्न स्तरों पर सामने आई कथित गड़बड़ियों ने आयोग की विश्वसनीयता पर असर डाला है। ऐसे में CGPSC के नियंत्रक को हटाया जाना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि शासन के आदेश में तबादले का आधार प्रशासनिक बताया गया है, लेकिन आयोग की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस बदलाव को अहम माना जा रहा है। भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठते रहे हैं सवाल छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में CGPSC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बीते वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम, चयन सूची और कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। इससे आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज हुई है। प्रशासनिक फेरबदल के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी आयोग की कार्यप्रणाली में कितनी पारदर्शिता और जवाबदेही ला पाते हैं। शासन के इस निर्णय के बाद अभ्यर्थियों की नजर भी CGPSC की आगामी परीक्षाओं और प्रक्रियाओं पर टिकी रहेगी।
7 वरिष्ठ अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
GAD के आदेश के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा के कुल 7 वरिष्ठ अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है। सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में आवश्यक बदलाव और कामकाज में कसावट लाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं CGPSC के नियंत्रक को हटाए जाने के बाद आयोग से जुड़े पुराने विवाद और उसकी कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब सवाल यह है कि यह प्रशासनिक बदलाव सिर्फ पदस्थापना तक सीमित रहेगा या CGPSC की लगातार कमजोर होती छवि को सुधारने के लिए व्यापक स्तर पर भी कदम उठाए जाएंगे।





