मूलभूत सुविधाओं से वंचित बोगदा बस्ती के लोग

मूलभूत सुविधाओं से वंचित बोगदा बस्ती के लोग

लखन लोहार (संवाददाता) 

बंडा़मुंडा़ में जहाँ रेलवे कर्मचारियों के प्रत्येक आवासो में बिजली, पानी, साफ-सफाई,सड़क मार्ग आदी मूलभूत सुविधाओं की उत्तम व्यवस्था है। वही नीजी आवासो में रहने वाले बस्ती वासियों के लिए यही मूलभूत सुविधाएं एक सपने जैसा है और नेताओ के लिए एक चुनावी मुद्दा। 

अभी हाल ही में सफाई साथियों द्वारा पूरे बंडा़मुंडा़ क्षेत्र में पैदल रैली निकालकर सफाई का महत्व बताया जा रहा था। पर लोग सफाई करे तो कैसे। कचरा लेकर कहाँ फेके। चारो ओर रेलवे के आवास या कार्यालय है। जहाँ कचरा फेका नही जा सकता। 

इन बस्तियों के नालियो में बारहों महिने क्षमता से अधिक गंदे पानी का बहाव होता रहता है।बरसात के दिनों में इन नालियों का गंदा पानी बढ़कर घरों में घुस जाता है, पर, इन्ही बस्तियों के लोग साफ पानी के लिए तरसते है। 
बोगदा बस्ती के महिलाओं का कहना है कि पानी के लिए पचासो परिवार केवल एक चापाकल (हैडपंप) पर निर्भर है। जो नाकाफी है। 
बस्ती में आने जाने के लिए उपयोग की जानेवाली सड़क मार्ग जर्जर अवस्था में पहुँच गई है पर इसकी सुध लेने वाला कोई नही। 

ऐसे में प्रश्न उठता है कि बंडा़मुंडा़ जैसे समृद्ध रेलवे क्षेत्र में एक ओर जहाँ रेलवे के आवासो में रहने वालों के लिए उत्तम दर्जे की सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है ,वही  रेलवे आवासो और कार्यालयों के बीच बसे बस्तीवासी मूलभूत सुविधाओं से बंचित क्यों है। 
और एक ओर जहाँ स्थानीय प्रशासन राउरकेला स्मार्टसीटी को विश्व का सबसे स्वच्छ शहर बनाकर एक नंबर पर लाना चाहती है वही राउरकेला से सटे बस्तियों में स्वच्छता का आभाव क्यों है। 
इन बस्तियों में गंदगी की वजह से कई संक्रमण जनित बीमारियों के पनपने का खतरा बना रहता है। 

आज बोगदा बस्ती की महिलाओं में प्रशासन और जनप्रतिनियो के लिए आक्रोश देखा जा रहा है,इसका असर आनेवाले चुनाव में देखने को मिल सकता है क्योंकि इन्होने चुनाव वहिस्कार करने का निर्णय ले लिया है।