मदनवाड़ा हमले की 12वीं बरसी
नितिन सिन्हा (संपादक"खबरसार")
*मदनवाड़ा हमले की 12वीं बरसी पर शहीदों को नमन..*
प्रदेश में आज से 12 साल पहले आज ही के दिन 12 जुलाई 2009 को नक्सलियों ने भयंकर हमला कर एक साथ 29 पुलिसकर्मियों की हत्या की थी।
शहीद हुए पुलिस कर्मियों में एक बेहद कुशल,व्यवहारिक और लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक शहीद वी के चौबे भी शामिल थे।।।
राजनांदगांव जिले के कोरकोट्टी-मदनवाड़ा इलाके में 12 जुलाई 2009 की सुबह राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा स्थित ग्राम कोरकोट्टी एवं कारेकट्टा में नक्सलियों ने हमला किया था। इस दौरान राजनांदगांव के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे सहित कुल 29 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
घटना के दूसरे दिन रविवार को मानपुर थाना इलाके में पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी और शहीद जवानों के परिजनों ने शहादत को नमन किया था और शहीदों को अंतिम विदाई जरूर राजनंदगांव में दी गई थी। परन्तु इस तरह एक साथ 29 शहीदों की लाशें देखकर पूरा छ ग दहल चुका था।
घटना के बाद शहीद पुलिस अधीक्षक चौबे की दिलेरी की चर्चा हर जुबान पर थी। उन्हें सुबह-सुबह यह सूचना मिली थी कि कोरकोट्टी गांव के पास नक्सलियों ने दो पुलिस जवानों को मार दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही अपनी एक टीम लेकर तत्कालीन एस.पी. वी के चौबे मौके के लिए रवाना हो गए थे। आम तौर पर इस तरह के आपरेशन में पुलिस अधीक्षक सीधे बहुत कम जाते रहे हैं। फिर भी अपने जवानों की शहादत की घटना सुनकर अपनी जान की परवाह किए बगैर sp वी के चौबे घटना स्थल पर पहुंच गए। जहां भारी असलाहों के साथ पहले से ही घात लगाए बैठे करीब 350 नक्सली उन पर गिद्ध की तरह टूट पड़े।। दोपहर तक यह जानकारी मिली कि फायरिंग अब भी जारी है और एस पी चौबे भी इसमें फंस हुए हैं। पूरे इलाके को 350 से ज्यादा नक्सलियों ने घेर रखा है और भारी गोली बारी कर रहे हैं। बहुत से पुलिस जवान शहीद हो चुके है।
इधर शाम तक जिला मुख्यालय के पुकिस ग्राउंड में एस पी समेत 29 शहीद पुलिस जवानों की लाशें आ गई थी ।
नक्सलियों ने इस हमले को एक ऑपरेशन की तरह प्लान किया था। बताया जाता है कि उन्होंने हमले के पूर्व की गई रेकी में शहीद sp चौबे के स्वभाव को भी अच्छी तरह से जान गए थे । फिर भी उन्हें इस बात का यकीन नही था कि खुद पुलिस अधीक्षक उनके बिछाए जाल में फंस जाएंगे।। हमले के बाद शहीद पुलिस कर्मियों की लाशों के आगे नक्सलियों ने बर्बर नृत्य कर नक्सली क्रांति के नारे लगाए थे,इस हमले को उन्होने *ऑपरेशन विजय* का नाम दिया था।
घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह ने घटना की जानकारी दिल्ली में तबकी केंद्र सरकार को दिया और खुद राजनंदगांव आ गए।
तब तक पूरे देश में इस घटना की चर्चा होने लगी थी। यह पहली घटना थी जब एस पी रैंक के अधिकारी को नक्सलियों ने इस तरह मारा था। अब तक राज्य में इस तरह की दूसरी कोई घटना नहीं हुई। इस हमले को नक्सलियों ने *ऑपरेशन विजय* का नाम दिया था। पुलिस सूत्रों के बताए अनुसार पुलिसवालों की हत्या के बाद घटना स्थल पर ही नक्सली शोर-शराबे कर खुशियां मना रहे थे। उन्होने इस घटना का वीडियो भी बनाया था।
नक्सलियों ने सभी शहीद जवानों के हथियार और बुलेटप्रूफ जैकेट तक लूट लिया थे। फिर सभी हथियारों को एक जगह रखकर वापस एक और वीडियो बनाया था। जिसे बाद में वायरल कर अपने खतरनाक मंसूबों के दुष्प्रचार के साथ सरकार को खुली चुनौती दी थी।। प्रस्तुत वीडियों में करीब 500 की तादाद में नक्सलियों को एक जगह जमा होते और जश्न मनाते देखा गया था। जश्न में नक्सलियों ने पुलिस और सरकार के खिलाफ खुलकर नारे बाजी भी की थी।।
इस वारदात के बाद मदनवाड़ा-कोरकोट्टी इलाका नक्सलियों का गढ़ बन गया था। पुलिस के लिए यह घटना एक बड़ा चैलेंज था। जिसे राजनादगांव पुलिस ने स्वीकार भी किया और बीते 12 सालों में इस इलाके से नक्सलवाद का प्रभाव क्षेत्र में धीरे-धीरे खत्म कर डाला । पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 2009 के बाद अब तक इस पूरे इलाके में बड़ी नक्सल घटना नही घटी है,न ही नक्सलियों को स्थानीय मानव तंत्र से पूर्व जैसा समर्थन मिल सका है। वहीं लगातार नक्सल-आपरेशन लांच कर पुलिस बल ने इस क्षेत्र में सकिय 50 के आसपास छोटे-बड़े नक्सली नेताओं और कमांडरों को ढेर कर दिया,इसके अलावा आगे चलकर करीब 70 से 80 की संख्या में दूसरे सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और वे सभी मुख्यधारा की तरफ लौट आए।

इधर क्षेत्र में सरकारी प्रयास से विकास कार्यों ने तेज गति पकड़ ली। खास कर शिक्षा क्षेत्र में यहां बड़ा बदलाव आया।।
हालांकि *तब से आज तक अर्थात मदनवाड़ा से तररेम* (2009 से 2021) तक नक्सलियों ने भी पूरे राज्य में अपनी जबरदस्त हैवानियत का प्रदर्शन किया । रानिबोदली और राजनादगांव से लुटे गए,हथियारों का इस्तेमाल माओवादियों ने ताड़मेटला,सुकमा जैसे दूसरे अन्य बड़े नक्सली हमलों में किया।
इन हमलों में उन्होने सैकड़ों की संख्या में पुलिस जवानों सहित दर्जनो राजनेताओं और उतनी ही संख्या में जनप्रतिनिधियों की हत्याएं की।।
इस दौरान सरकार की गलत नीतियों पुलिस के माध्यम से ग्रामीणों पर बढ़ते अत्याचार और दमन ने नक्सलियों को राज्य के वनांचलों में फलने-फूलने का बेहतर अवसर प्रदान किया।
हालांकि इसमें कोई दो राय नही है कि मदनवाड़ा हमले के बाद राजनंदगांव जिले में हालात बड़ी तेजी से सामान्य हो गए। परन्तु राज्य का एक बड़ा इलाका बहुत पीछे छूट गया। जहां आज भी पुलिस-नक्सली हिंसा का खूनी दौर बदस्तूर जारी है।। यहां से आएं दिन शहादत और मौत की खबरें आती रहती हैं।।
इसके पीछे की वजह सरकारी तंत्र के द्वारा लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों व न्याय व्यवस्था से दूर कर,उन्हें प्रतिहिंसा के लिए मजबूर करना और लोगों की इस नाराजगी का अनुचित लाभ लेकर उन्हें छद्म क्रांति के नाम पर बर्बर हिंसा के लिए प्रेरित करना दोनों ही गलत तरीकों के प्रयोग का जारी रहना है।।
*प्रदेश में अमन और शांति की अपेक्षा के साथ शहीद पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे व मदनवाड़ा(राजनंदगांव)के अन्य सभी शहीदों को विनम्र-श्रद्धांजलि।।।*





