भागवत और भक्ति पर कार्यक्रम आयोजित
श्रीमद्भागवत में भारतीय दर्शन का सार निहित है।गोपबंधु पुस्तकालय में 'अंतिम जीवन का प्रतिबिंब और श्रीमद्भागवत' पर संगोष्ठी।
प्रेस विज्ञप्ति
गोपबंधु पुस्तकालय, राउरकेला सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ, उत्कल स्नेही महिला समिति और रोटरी क्लब रिवरसाइड ने गोपबंधु पुस्तकालय के सत्य कक्ष में आयोजित एक आध्यात्मिक संगोष्ठी में भाग लिया, जहाँ डॉ. अद्वैतानंद महाराज ने श्रीमद भागवत की महानता पर चर्चा की और कहा -
वेद, वेदांत, महापुराण, पुराण आदि की रचना करने पर भी व्यासदेव संतुष्ट नहीं हुए। अंत में उन्होंने भागवत की रचना कर स्वयं को तृप्त किया। शुक मुनि भागवत के वक्ता थे। उन्होने आगे कहा कि भक्ति चार प्रकार की होती है- अर्थ, अर्थार्थी, जिज्ञासु और ज्ञानी। भगवान को याद करना जीवन की सबसे बड़ी दौलत है। एक भक्ति विशेषता। शुद्ध भक्त ज्ञानी भगवान को अत्यंत प्रिय होता है। नाम जपने से जीव के सारे दोष दूर हो जाते हैं।जीवन के प्रत्येक क्षण में भगवान के नाम का स्मरण करने से मनुष्य का कल्याण होता है।
पुस्तकालय अध्यक्ष इंजी. नवघन साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में कवि राजीव माना ने अतिथि परिचय दिया। कल्पतरु आश्रम की संस्थापक श्रीमती सरोजिनी पति ने स्वागत भाषण दिया।
इस कार्यक्रम में श्रीमती सविता साहू, डॉ. गिरिजा शंकर गोस्वामी, लक्ष्मण नाथ दास, हरिहर नायक, सिद्धिनाथ ज्योती प्रमुख योगदानकर्ता थे, जबकि डॉ. गोकुलानंद साहू, डॉ. प्रफुल्ल चंद्र महापात्र, महेंद्र कुमार पटनायक, मिहिर रॉय, विजयलक्ष्मी पटनायक, राजकुमार मोहंती, डॉ. श्रीमती गीतांजलि जावी, अच्युतानंद पटेल , सुरेंद्र कुमार पांडा गोस्वामी, गीता कैप्टन, बिचित्रानंद साहू, अजय कुमार मोहंती, राधामोहन नाइक, किशोरी मोहन कर, अशोक कुमार पटनायक, भगवान पाधी, गोविंद गोपाल, सुषमा मणि, गंगाधर पुहन, डॉ. गोष्ठ चंद्र जावी, प्रद्युम कुमार मिश्रा, ज्योस्ना क्वीन पॉट, हृषिकेश सबियार सिंह, जे.एम. प्रहराज, विभूति भूषण साहू, डॉ. एस.बी. नेपाक, कैलाश चंद्र मोहंती, गणेश कुमार साहू, राजेश कुमार साहू, बसंत कुमार ताशी, राघव पंड्या, एपी उपाध्याय, ध्रुव चरण नाइक, नयना शुक्ला, किरिन गोपाल सहित सैकड़ों प्रमुख बुद्धिजीवी उपस्थित थे। अंत में डॉ. गोकुलानंद साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।





