बे मौसम बारीस से नष्ट होते धान के फसल ने किसानों की चिंता बढा़ दी

बे मौसम बारीस से नष्ट होते धान के फसल ने किसानों की चिंता बढा़ दी

हरहर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक) 
पश्चिम ओडिशा के झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र में पिछले दो दिनों से धीमी बारीस हो रही है। इस समय अंचल में धान की कटाई- पिटाई भी चल रही है । कई खेतो में धान अभी पक कर कटने के लिए तैयार खड़ी है, तो कही कटी पड़ी है। ऐसे समय में बारसात का होना धान की फसल के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। 
कटकर खेतो में पड़ी धान पर बरसात का पानी गीरने से कटी हुई धान पूरी तरह से नष्ट हो रही है, वही पककर तैयार हो चुकी धान बारीस की बूंदो की मार से झडने लगे है। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।


पश्चिम ओडिशा में धान की दो फसले उगाई जाती है। जो किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है। ऐसे में बर्षा ऋतु में उगाई जाने वाली धान की फसल की कटाई दीपावली त्योहार के बाद से आरम्भ हो जाती है जिसे बेचकर किसान विवाह, नया साल, मकर संक्रांति,होली,बच्चो की पढ़ाई का फीस व अन्य खर्चे निपटाते है। यह खर्चे जेष्ठ माह में धान की रोपाई करने तक लगा रहता है, जिसका खर्च काफी हद तक बरसात के समय लगाई गई धान के फसल को बेचकर निकाला जाता है। लेकिन इस वर्ष बे मौसम बारसात से नष्ट होते धान की फसल ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी।