बिजली संयंत्र के बंद होने से श्रमिकों का भविष्य अंधकार में
अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)
तालचेर थर्मल पावर प्लांट कब आरम्भ होगा? यह प्रश्न ओड़िशा के नागरीको के मन में उठ रही है।
यहाँ कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
आपको बता दें कि जवाहरलाल नेहरू ने 14/04/1964 को तालचेर का दौरा किया और ओडिशा की भलाई के लिए एक थर्मल पावर प्लांट (थर्मल पावर प्लांट) की आधारशिला रखी। इसके बाद दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन 1967 में की ।राज्य सरकार इसके प्रबंधन के लिए जिम्मेदारी ली थी और ओडिशा को निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करती थी। इस पावर प्लांट के लिए तालचेर प्रखंड के जगन्नाथपुर पंचायत सहित बंतोल, संथापाड़ा और गुरुजंगुली गांवों में 400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया और तालचेर ताप विद्युत संयंत्र की स्थापना की गई।
तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने 1991 में इस प्लांट को एनटीपीसी के सुपुर्द कर दिया, तब से, यह बिजली संयंत्र एनटीपीपीसी द्वारा चलाया जा रहा है और कई वर्षों से बिजली उत्पादन कर रहा है। चूंकि बिजली संयंत्र धीरे-धीरे अप्रचलित और पुराना हो गया था, यह अनुमान लगाया गया था कि नई अत्याधुनिक तकनीक कम लागत पर अधिक बिजली पैदा करेगी और राज्य सहित दूसरे राज्यों को भी बिजली प्रदान करेगी। इसलिए नया प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया।
इस संदर्भ में बिजली संयंत्र का उद्घाटन समारोह भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हाथो एफसीआई पुनर्निर्माण स्थापना दिवस के दिन होना निर्धारित किया गया था। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि हुआ की आखिरी वक्त पर यह हो नही पाया। नए प्लांट की स्थापना भी संदेह के घेरे में है।
यहाँ पिछले साल 2021 की मार्च 31 तारीख से बिजली उत्पादन बंद पडा़ है।
एनटीपीसी ने पिछले साल 1 अप्रैल को केंद्रीय श्रम मंत्रालय में 460 मेगावाट बिशिष्ट इस परियोजना को बंद करने के लिए आवेदन किया था। इसे देखते हुए केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने टीटीपीएस को बंद करने के आवेदन को मंजूरी दी थी।
इस बिजली संयंत्र के बंद होने से अब तक 1,500 से अधिक ठेका श्रमिकों को निकाल दिया गया है,
टीटीपीएस की इस कार्रवाई के विरोध में श्रमिकों ने बारंबार राज्य और केन्द्र सरकार को अवगत कराया पर इनकी समस्या जस की तस बनी रही।
इस संयंत्र के बंद होने सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में डूब गया है।





