नशे ने बूझा दी घर का एकलौता चिराग
नशा नाश का कारण है - हर्रैया में फिर उजड़ा एक घर, मनोरमा घाट पर खत्म हुई इकलौते चिराग की जिंदगी
हर्रैया, बस्ती।
कहावत है नशा नाश का कारण है और यह कहावत आज हर्रैया नगर पंचायत के मुरादीपुर गांव में फिर सच साबित हो गई। अपने मां-बाप के इकलौते बेटे, अच्छे घराने के विशाल सिंह की जिंदगी आज नशे की भेंट चढ़ गई। खबर है कि विशाल सिंह मनोरमा घाट पर नहाने गए थे, वहीं संदिग्ध हालत में उनकी मौत हो गई। परिजनों और गांव वालों का कहना है कि विशाल अच्छे परिवार से था, पढ़ा-लिखा था, लेकिन पिछले कुछ समय से नशे की लत ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया था। इकलौती औलाद के जाने से घर में कोहराम मचा है। मां का रो-रो कर बुरा हाल है, पिता बेसुध हैं। गांव में हर जुबान पर एक ही बात है कि एक और हंसता खेलता घर उजड़ गया। यह कोई पहली घटना नहीं है।

हर्रैया बन रहा है उड़ता पंजाब - पिछली खबरों का सच
पिछले महीने ही हमने खबर प्रकाशित की थी - "स्कूल के बाहर बिक रहा है जहर, हर्रैया की गलियों में खुलेआम नशे का कारोबार"। उस खबर में हमने बताया था कि कैसे हर्रैया बाजार, मनोरमा घाट के आसपास, मुरादीपुर, गायघाट और नगर के कुछ चाय-पान की दुकानों की आड़ में गांजा, स्मैक और नशीली गोलियों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। 10 से 15 साल के बच्चे तक इस जहर की चपेट में हैं। उस खबर के बाद पुलिस ने कार्रवाई दिखाते हुए 2-3 छोटे कारोबारियों को जेल भी भेजा, उनके पास से पुड़िया भी बरामद दिखाई गईं। लेकिन सवाल यह है कि जड़ कहां है? हर बार छोटे मोहरों को पकड़ कर बड़ी मछलियां बचा ली जाती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नशे का यह नेटवर्क बहुत बड़ा है। बाहर से माल आता है और यहां लोकल स्तर पर सप्लाई होता है। शाम ढलते ही मनोरमा नदी के किनारे, सुनसान जगहों पर युवाओं की टोली देखी जा सकती है।
आखिर इसके पीछे कौन है?
विशाल की मौत ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं -
1. जब पुलिस कार्रवाई कर रही है तो फिर नशा मिल कहां से रहा है?
2. इस पूरे खेल के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है, जिसे पुलिस पकड़ नहीं पा रही?
3. क्या सिर्फ दो-चार पुड़िया वालों को पकड़ कर खानापूर्ति की जा रही है?
4. कब होगी बड़ी कार्रवाई?
विशाल सिंह की मौत डूबने से हुई या नशे के ओवरडोज से, यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि अगर समय रहते इस लत से उसे बाहर निकाला जाता, अगर नशा इतनी आसानी से उपलब्ध न होता, तो आज एक मां की गोद सूनी न होती।

कब तक उजड़ते रहेंगे घर?
हर्रैया को उड़ता पंजाब बनने से रोकना होगा। यह सिर्फ पुलिस की नहीं, समाज की भी लड़ाई है। जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, शिक्षकों और अभिभावकों को आगे आना होगा।आज इस घटनाक्रम ने हर घर को झकझोर दिया है। स्थानीय पुलिस और स्थानीय गोताखोर जिसमें पूर्व प्रधान उभाई रामसागर निषाद की मेहनत से शव को बड़ी मेहनत के बाद खोजा गया। हर्रैया थाना अध्यक्ष और उनकी टीम लगी रही। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लेकिन पुलिस केवल पोस्टमार्टम ही करायेगी की जहर बेचने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई भी करेगी?
प्रशासन से मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और नशे के इस पूरे नेक्सस पर बड़ी कार्रवाई हो, ताकि किसी और विशाल की जान इस तरह न जाए। एक घर तो आज उजड़ गया, दूसरा घर उजड़ने से पहले जाग जाइए।





