त्यौहार आते ही शक्रीय हुए मिलावट खोर

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त्यौहार आते ही शक्रीय हुए मिलावट खोर

त्योहारों के मौसम में मिलावटखोरी होना एक सामान्य घटना हो गई है।दिपावली को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। वे मिठाइयों और सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) में धड़ल्ले से मिलावट कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ख़तरा है।
मिलावट एक ऐसी समस्या है जो हमारे समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी है। यह समस्या केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है। कम लागत में अधिक कमाई करनै के लालच में मिलावटखोर किसी भी हद तक जा सकते हैं।
मिठाइयों में मिलावट एक आम बात हो गई है। मावा, छेना, पनीर, खोया जैसे उत्पादों में रसायन मिलाए जा रहे हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरा होता है, बल्कि यह हमारे समाज की नैतिकता को भी कमजोर करता है। इस तरह के व्यापार करने वालों के लिए जीवन से ज्यादा धन महत्व रखता है।

एक और बड़ी समस्या है। चर्बी और केमिकल से बना  देशी घी । इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरा होता है, बल्कि यह हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी ठेस पहुंचाता है।पूजा अनुष्ठान में  चर्बी युक्त घी अच्छी कंपनियों के नाम पर विश्वास के साथ प्रयोग हो रहा है ।जो विश्वास के साथ विश्वासघात है । कनस्तर के कनस्तर देशी घी बाजारों में उपलब्ध है जबकि गांवों में आंखों में घी लगाने को नहीं मिल पा रहा है।दो हजार से बाइस सौ रूपए में ब मुश्किल देशी घी मिल पाता है जबकि ब्रांडेड देशी घी पांच सौ रुपए किलो मिल जाता है।ड्राई फ्रूट्स में भी मिलावट की जा रही है। इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरा होता है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के प्रति भी लापरवाही को दर्शाता है। उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों को लेने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उपभोक्ताओं को मिलावट की पहचान करने के तरीके पता होने चाहिए। उन्हें सचेत होकर खरीदारी करनी चाहिए और मिलावटी उत्पादों से बचना चाहिए। इसके अलावा, मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
सरकार को चाहिए 
मिलावट की पहचान करने के लिए उपभोक्ताओं को   प्रचार प्रसार कर गुणवत्ता की पहचान का तरीका बतालवाए।
 सरकार को उत्पाद की जांच करने के लिए  टीम बनानी चाहिए जिससे पारदर्शी जांच और कठोर करवाही ऐसे लोगों के विरुद्ध हो सके 
सचेत खरीदारी करने के लिए उपभोक्ताओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए  जिस उत्पाद को वह खरीद रहे हैं वह विश्वसनीय है भी, या नहीं।  इसके लिए सरकार को भी कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। क्योंकि यह ज़हर रोगों को  न्योता दे रहा है ।असमय ही लोग लीवर फेल, हार्ट फेल, किडनी फेल से त्रस्त हो काल के गराल में समाये जा रहें हैं। जिससे जहां जन हानि हो रही है वहीं स्वस्थ्य संबंधित समस्या बढ़ रही है।समय से इलाज़ न होने से और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोग प्रशासन के रवैए से नाराज़ होते हैं।
क‌ई सरकारों ने दुकान दारों को सहूलियत देने के लिए क‌ई कानूनों में बदलाव किए हैं। जिससे इन्हें कठोर करवाही से राहत मिले और लालफीताशाही के चंगुल से मुक्त हों। परंतु क‌ई लोग इसका फायदा उठाकर मिलावट खोरी कर धनार्जन  करनें में लगें हैं।ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई  होनी चाहिए। जिससे आम आदमी को शुद्ध और प्रमाणिक उत्पाद मिल सके।इस त्योहारी सीजन में कम है कम सरकार से यही अपेक्षा है।