डॉक्टरों के वेतन समानता आंदोलन पर ओडिशा सरकार ने लगाया एस्मा

डॉक्टरों के वेतन समानता आंदोलन पर ओडिशा सरकार ने लगाया एस्मा

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

ओडिशा सरकार ने मंगलवार को डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा की जा रही हड़ताल को रोकने के लिए आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (ESMA), 1988 लागू कर दिया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब आंदोलनरत डॉक्टरों ने प्रतिदिन ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की अवधि एक घंटे से बढ़ाकर दो घंटे कर दी थी।
डॉक्टर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन, सभी संवर्गों में आनुपातिक कैडर पुनर्गठन तथा सुपर-स्पेशलिस्ट, स्पेशलिस्ट और डिप्लोमा मेडिकल प्रशासकों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, फार्मासिस्टों, पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीशियनों तथा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (संविदा कर्मियों सहित) द्वारा किसी भी प्रकार की हड़ताल या काम बंद करने पर मंगलवार से अगले छह महीनों तक प्रतिबंध रहेगा। 
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर 26 दिसंबर से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। पहले यह बहिष्कार प्रतिदिन एक घंटे का था, जिसे 5 जनवरी से सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे कर दिया गया। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों की देखभाल और सर्जरी सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहीं।
यह आंदोलन ओडिशा मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (OMSA) के नेतृत्व में नवंबर से जारी है। डॉक्टरों ने अपनी 10 सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलन शुरू किया था, जिसमें बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की मांग भी शामिल है। ओपीडी बहिष्कार से पहले डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया था।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग द्वारा ड्यूटी पर लौटने की अपील और मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के आश्वासन को डॉक्टर संघ ने ठुकरा दिया, जिसके बाद सरकार ने एस्मा ESMA लागू किया। सरकार ने डॉक्टरों की मांगों की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति भी गठित की है।
हालांकि, डॉक्टर संघ ने समिति के गठन के प्रस्ताव को भी अस्वीकार करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
डॉक्टर संघ के अनुसार, राज्य में स्वीकृत 15,776 पदों के मुकाबले केवल 6,000 से कुछ अधिक सरकारी डॉक्टर कार्यरत हैं, यानी 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं। संगठन का कहना है कि इससे मौजूदा डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है।
डॉक्टरों की अन्य मांगों में केंद्र सरकार के समान वेतन, सभी स्तरों पर कैडर का आनुपातिक पुनर्गठन, सुपर-स्पेशलिस्ट और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन, पोस्टमार्टम भत्ता और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं।