जीवन का सबसे बड़ा पाप - नितिन सिन्हा की कलम से

जीवन का सबसे बड़ा पाप  - नितिन सिन्हा की कलम से

नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार) 

जीवन का सबसे बड़ा पाप सामर्थ्यवान होते हुए भी किसी निरीह,निर्दोष और आप पर भरोसा करने वालो को धोखे से षड्यंत्र में फंसाना है।
श्री कृष्ण और भीष्म संवाद

इसलिए लेटना पड़ा था भीष्म को वाणों की शैय्या पर 

हालांकि मृत्यु के दौरान वे छः महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे थे। इस दौरान भगवान कृष्ण जब भीष्म के पास आए तो उन्होंने पूछा, मैंने ऐसे कौन-से पाप किए हैं कि वाणों की शैय्या पर लेटा हूं, पर प्राण नहीं निकल रहे हैं। 

भगवान कृष्ण ने तब उन्हे उनके दो कर्म याद दिलाएं,,

कहा कि पहले आप अपने पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन-सा पाप किया है। भीष्म बहुत ज्ञानी थे। उन्होंने कृष्ण से कहा कि मैंने अपने पिछले जन्म में रत्ती भर भी पाप नहीं किया है।

कृष्ण ने उन्हें बताते हुए कहा कि पिछले जन्म में जब आप एक बलशाली राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान आपने एक नाग जो रास्ते से गुजर रहा था,,घोड़े की थाप से वो सहम कर ठिठक गया था,,आप उसे आराम से रास्ता पार करने दे सकते थे,,लेकिन आपने उसको जमीन से उठाकर कांटों के बीच फेंक दिया था, पर 6 माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। 

दूसरा चक्रव्यूह भेद कर वीर अभिमन्यु बाहर नहीं जा सकता था,उसे इस बात का पूरा भरोसा था कि आपके रहते हुए उसकी धोखे से हत्या कोई नही कर सकता है।। आपने यह जानते हुए भी उस निहत्थे और आहत की षड्यंत्र पूर्वक हत्या को अपना मौन समर्थन दिया था।। जबकि आप अकेले ही इतने सामर्थ्य वान थे कि उसकी नृशंस हत्या को रोक सकते थे।।

पितामह आपके आज का कष्ट उन्ही कर्मों का फल है जो आप 6 महीने तक इन जहरीले बाणों की शैय्या पर लेटे हैं।