जहाँ रोजाना दाँव पर लगती है जिंदगी
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
अजीविका के लिए दांव पर है जिंदगी। यहाँ के लिए सरकार की योजनाएं एक सपना है। सरकारी नियमों का खूला उल्लंघन: जीवन संकट में।
तालचेर उपखंड़ के कडिंहा प्रखण्ड़ के लोगों की ज़िंदगी रोजी रोटी के लिए दाँव पर लगी है। परिवार का सहारा और पेट पालने के लिए सामने है जिंदगी और मौत से जूझती रोजगार। नदी में तैरती हुई नौका की जो तस्वीर आप देख रहे है,यह कोई पर्यटन स्थल नहीं है जहां पर्यटक नौका विहार कर प्राकृतिक वातावरण का आनंद उठा सकें। यह कुछ लोगों के लिए मजेदार हो सकता है लेकिन स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की बात है।
यह हृदय विदारक दृश्य किसी उपनगर का नहीं है, देश के विकास में अहम भूमिका निभाने वाली यह काले हीरों का शहर तालचेर की है। जो तालचेर अनुमंडल के कनिहे प्रखंड अंतर्गत गढ़ाशिला पंचायत के शगदीपाल, गुरबहाल, चिंता मणिपुर के ग्रामीणों की हकीकत को प्रत्यक्ष बयांँ कर रही है। नेताओ के लिए इस अंचल का विकास केवल चुनावी मुद्दा है।
इस नदी पर बनने वाला पुल का काम आधे मे ही रह गया फलतः उल्लेखनीय गाँव के मरीजों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है और इन्हे असामान्य परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। ओलावृष्टि हो, बरसात हो, सर्दी हो, दिन-रात उपचार के लिए हो या प्रसव पीड़ा से राहत पाने के लिए चिकित्सालय या शहर तक जाने के लिए एक छोटी सी नौका ही एक मात्र विकल्प है।
तालचेर क्षेत्र में सरकारी विकास की धारा का दंभ भरने वाले नेताओ के वादे और दावे गलत सावित हो रहे है।





