क्यों दी गई गुरूकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय द्वारा भ्रामक और अधुरी जानकारी

क्यों दी गई गुरूकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय द्वारा भ्रामक और अधुरी जानकारी

ऐसा माना जाता है कि आरटीआई में सही सूचना प्रदान की जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है कभी कभी गलत,भ्रामक,और अधुरी सूचना भी दी जाती है। इसका एक उदाहरण गुरूकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय, वेदव्यास द्वारा आरटीआई में दी गई अधुरी और भ्रामक जानकारी है। लेकिन यहाँ प्रश्न उठाना आवश्यक है कि- गुरुकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय,वेदव्यास द्वारा क्यों दी गई भ्रामक एवं अधुरी जानकारी।

गुरुकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय से आरटीआई के जरिए सन् 2000 में विद्यालय में दसवीं कक्षा की वोर्ड परीक्षा के संबंध में जानकारी मांगी गई थी, जिसपर विद्यालय के मुख्य पंडित द्वारा यह जबाब दिया गया था कि सन् 2000 में जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय श्रीविहार पूरी द्वारा दसवीं की वोर्ड परीक्षा औपचारिक तौर पर आयोजित की गई थी, लेकिन इस परीक्षा में कितने विद्यालयों के कितने परिक्षार्थीयों ने दसवीं की वोर्ड परीक्षा दी थी, और परीक्षा कितने पालियो में किस दिन/तारीख से किस दिन/तारीख तक ली गई थी तथा परीक्षा में किन शिक्षकों की ड्युटी लगी थी इसकी जानकारी नहीं दी गई। जबकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आरटीआई में यह सूचना दी गई है कि सन् 2000 में गुरुकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय, वेदव्यास में दसवीं की वोर्ड परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र नहीं दिया गया था।
यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि यदि सन् 2000 में गुरूकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय में श्री जगन्नाथ विश्वविद्यालय द्वारा दसवीं की वोर्ड परीक्षा संचालित की गई थी तो, इस परीक्षा में किस विद्यालयों के कितने परीक्षार्थी सामिल हुए थे,परीक्षा का समय और परीक्षा लेनेवाले शिक्षकों की जानकारी क्यों नहीं दी गई। शिक्षाविदों की माने तो दसवीं की वोर्ड परीक्षा औपचारिक तौर पर संचालित नहीं की जा सकती उसके लिए परीक्षा केंद्र का होना आवश्यक है जिसका निर्णय जिला शिक्षा अधिकारी / विभाग द्वारा लिया जाता है। 
अब प्रश्न उठता है कि गुरुकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय ने ऐसे जवाब क्यों दिए, तो आपको बतादें की इसके तार बिसरा के सरकारी हिंदी उच्चप्राथमिक विद्यालय में कार्यरत इंदूराय नामक एक विवादित शिक्षिका से जुड़े है। इंदूराय को दसवीं पास के आधार पर शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया है। आरटीआई के माध्यम से  प्राप्त जानकारी के अनुसार इंदुराय ने सन् 2000 में गुरूकुल वेदव्यास संस्कृत विद्यालय में वोर्ड की परीक्षा दी थी। जो उसके परीक्षा प्रवेश पत्र पर अंकित है और यह प्रवेश परीक्षा पत्र एक ऐसे विद्यालय "कल्पतरू संस्कृत विद्यालय, बसंती कालोनी" द्वारा जारी किया गया है। जिसका अस्तित्व आजतक नहीं मिल पाया है,इतना ही नहीं आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इंदूराय श्री जगन्नाथ विश्वविद्यालय श्री विहार पूरी से दसवीं कक्षा पास की है।  
मतलब साफ है कि गुरुकुल वेद व्यास संस्कृत विद्यालय के मुख्य पंडित ने इंदुराय का बचाव करने के लिए आरटीआई में मांगी गई जानकारी को भ्रामक और अधूरे तरीके से प्रस्तुत किया है,जबकि सच्चाई कुछ और है। इसकी उच्चस्तरीय जाँच किए जाने की आवश्यकता है।