कुडुख ओराम भाषा एवं एवं कुडुख बन्ना लिपि को संवैधानिक मान्यता देने की मांग

कुडुख ओराम भाषा एवं एवं कुडुख बन्ना लिपि को संवैधानिक मान्यता देने की मांग

राउरकेला : कुडुख ओराम भाषा एवं एवं कुडुख बन्ना लिपि को संवैधानिक मान्यता देने की मांग करते हुए आल इंडिया कुडुृख पड़हा युवक संघ की ओर से साेमवार को राउरकेला रिंग रोड में विशाल रैली निकाली गई। यह रैली बिरसा मुंडा चौक से निकलकर रिंग रोड होते हुए एडीएम कार्यालय,उदीतनगर पहुंचकर एडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।रैली के दौरान रिंग रोड व एडीएम कार्यालय पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किये गये। इस रैली में सुंदरगढ़ जिला के अलावा बालेश्वर, मयूरभंज समेत अन्य जिलों से भी समाज के 5000 से अधिक लोग शामिल हुए एवं अपने अधिकारों को लेकर नारेबाजी की। यह रैली गुरु बिक्रम भगत, रानी सिनगी दाई का जयजयकार करते हुए बिसरा चौक से एडीएम कार्यालय तक पहुँची।

आल इंडिया कुड़ुख पड़हा युवक संघ के अध्यक्ष रामचंद्र खलको के नेतृत्व में बिरसा चौक से निकली गई इस रैली में परंपरागत वेशभूषा में महिला व पुरुष शामिल हुए। गाजा बाजा के साथ नाच गान तथा समाज के महापुरुषों का गुणगान करते हुए लोग रिंग रोड से होकर नगर निगम चौक फिर एडीएम कार्यालय पहुंचे। इनकी मुख्य मांगाें में कुड़ख बन्ना लिपि प्राचीन कुड़ख भाषा को लिखने पढ़ने का माध्यम होने के कारण इसे संवैधानिक मान्यता देने , इस भाषा व लिपि को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, कुडुख भाषा को लिखने पढ़ने के मुख्य माध्यम के रूप में मान्यता देने, कुडुख भाषी बहुल क्षेत्र के स्कूलों में इस भाषा की पढ़ाई एवं शिक्षकाें की नियुक्ति करने, उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयाें में कुड़ख भाषा विभाग बनाने, आदिवासी भाषा के लिए के लिए केंद्र एवं राज्यों में स्वतंत्र भाषा आयोग स्थापित करने, प्राथमिक से उच्च स्तर तक देश भर में कुडुख पाठ्यक्रम को लागू करने, कुडुख बहुल क्षेत्रों में कार्यालयों में कुड़ुख भाषा को मान्यता देने आदि को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। इसमें ओडिशा, झारखंड, बंगाल व छत्तीसगढ़ से भी लोग शामिल हुए। एडीएम के जरिए भारत की राष्ट्रपति, भारतीय भाषा विकास विभाग मैसूर मुख्यालय समेत अन्य विभागों को ज्ञापन प्रेषित किया गया। इसमें संघ के मुख्य सचिव बुरुंगा वार्ला, सचिव किरण केरकेटा, सलाहकार शंकर तिर्की,  दुखनी एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद की सुषमा लकड़ा, मधुरा लकड़ा, कुंणहा समाज के चंद्र किसान, दीनबंधु किसान, सुंदर किसान, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ ओडिशा के अध्यक्ष नारायण मुंडा समेत अन्य लोगों ने इसका नेतृत्व लिया।